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तीन घंटे तक लड़ता रहा वह मौत से, पर प्रशासन बेपरवाह

चंडीगढ़.रविवार दोपहर हुई तेज बारिश से गांव धनास लेक के पास बने पुल के ऊपर तक पानी आ गया। पुल पर पानी का बहाव इतना तेज होगा, इसका सुशील कुमार (25), उसके चचेरे भाई सुशील और दोस्त सुरेश को बिलकुल भी अंदाजा नहीं था।

तीनों अपनी बाइक पर इस पुल से गुजरने लगे, लेकिन बाइक समेत ही बह गए। चचेरे भाई सुशील ने किसी तरह पुल का एक किनारा पकड़ लिया और लोगों ने उसे बाहर निकाल लिया। सुरेश पानी में बह गया, लेकिन उसने पानी के बीच खड़े एक पेड़ को पकड़ लिया और वहीं लटकता रहा। लेकिन सुशील तीन घंटे तक जिंदगी और मौत से जूझता रहा।

दो घंटे बाद फायर ब्रिगेड ने उसे बाहर निकाला। पीजीआई में रात 7.20 बजे उसकी मौत हो गई। सुशील ने कुदरत को चुनौती दी थी, लेकिन उसकी मौत की जिम्मेदारी लेने से प्रशासन मुंह नहीं मोड़ सकता। सुशील सेक्टर-२५ के मकान नंबर-८१६ में पत्नी और दो छोटी बेटियों साथ रहता था। उसके माता पिता सेक्टर-३८ में रहते हैं।

उसका दूसरा भाई जेल में है और वह खुद सेक्टर-१७ में करीब ४क्क्क् रुपये प्रति माह पर प्राइवेट नौकरी कर अपना गुजारा करता था। रविवार को सुशील गांव धनास निवासी अपने दोस्त सुरेश और सेक्टर-२५ निवासी अपने चचेरे भाई सुशील के साथ अपने घर जा रहा था।

लापरवाहियां

>> मौके पर पहुंची पुलिस और फायर ब्रिगेड के कर्मी शुरू में हक्के-बक्के खड़े रहे, उन्होंने सुशील को बचाने के लिए कोई कार्रवाई नहीं की।

>> हाइड्रोलिक लैडर देर से पहुंचा, उसके बाद करीब १५ मिनट तक करंट बंद करवाने को लेकर जद्दोजहद होती रही।

>> हाइड्रोलिक लैडर को पहले गलत जगह खड़ा किया गया।

>> पहली बार जब सुशील ऊपर तक आया, लेकिन उसे अच्छी तरह पकड़ा नहीं गया। जब वह पूरी तरह बाहर नहीं निकला था, तो पोल से बंधी रस्सी खुलवा दी गई।

>> सुशील का हाथ छूटने के बाद उसकी आस ही छोड़ देना।

>> इसके बाद जब रस्सी में खूंटा डालकर सुशील को बाहर निकाला गया, तो उसे मृत समझकर लटकाकर बाहर निकाला गया, जबकि उसकी सांसें चल रही थीं।

>> बाहर निकालकर न तो उल्टा कर उसके पेट से पानी निकाला गया और न ही तुरंत अस्पताल ले जाया गया। काफी देर तक सुशील जमीन पर ही पड़ा रहा।

अफसर भी जिम्मेदार..

सुशील की मौत के जिम्मेदार अफसर भी है। सुशील दो घंटे तक मौत से झूझता रहा,लेकिन मौके पर चौकी इंचार्ज कृपाल सिंह,एसएचओ रमेश,एएसपी मधुर वर्मा और कार्यकारी एसएसपी एस एस दून तक कोई न पहुंचा। इतना ही नहीं प्रशासन की तरफ से भी सिर्फ एडीसी इंद्रजीत सिंह संधू पहुंचे। वह भी तब जब सुशील को पानी से बाहर निकाल लिया गया था।





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