नई दिल्ली/ मुंबई. इंटरनेट के जरिए टेलीफोन पर असीमित बातचीत को मंजूरी मिल गई है। भारत के दूरसंचार बाजार में इसके कारण टेलीफोन की एसटीडी दरों में कमी आने की संभावना है।
क्या हुआ:
दूरसंचार नियामक (ट्राई) ने सोमवार को इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडरों को असीमिति इंटरनेट टेलीफोनी सेवाएं मुहैया कराने को मंजूरी दे दी है।
ट्राई ने एक बयान में कहा है कि ग्राहकों को इससे फायदा होगा क्योंकि इंटरनेट टेलीफोनी सस्ती और नए किस्म की सेवा होगी। भारतीय टेलीफोन उद्योग भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आ जाएगा। अब तक गैरकानूनी तौर पर हो रही इंटरनेट टेलीफोनी पर नियंत्रण हो जाएगा।
क्या असर होगा:
ट्राई की सिफारिशों के अनुसार एसटीडी सेवा मुहैया कराने वालों को आईएसपी से जोड़ा जाएगा। इसके लिए दोनों सर्विस प्रदाता मिलकर समझौता करेंगे।
क्या करेगी टेलीफोनी:
इंटरनेट टेलीफोनी के जरिए पर्सनल कंप्यूटर को फिक्स्ड लाइन फोन या मोबाइल से जोड़ दिया जाएगा। अभी एक वाइस काल केवल दो कंप्यूटरों के बीच ही संभव हो सकती है। यह किसी मोबाइल या फिक्स्ड लाइन फोन से नहीं हो पाती है। इससे आईएसपी के लिए आमदनी का अच्छा रास्ता खुल जाएगा।
कैसे काम करेंगे आईएसपी:
दूरसंचार विभाग की तकनीकी शाखा टेलीकाम इंजीनियरिंग सेंटर (टीईसी) इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडरों, यूनीफाइड एक्सेस सर्विस प्रोवाइडरों, बेसिक सर्विस प्रोवाइडरों और सेलुलर मोबाइल सर्विस प्रोवाइडरों को नंबर उपलब्ध कराएगी।
क्या है इंटरनेट टेलीफोनी?
>>इंटरनेट टेलीफोनी का मतलब है कि लंबी दूरी की टेलीफोन (एसटीडी) सेवा देने वाली कंपनियां और इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर (आईएसपी) मिलकर नेटवर्क बनाएंगे।
>> यह नेटवर्क मोबाइल और फिक्स्डलाइन टेलीफोन को इंटरनेट के जरिए आपस में जोड़ देगा।
>> अभी इंटरनेट टेलीफोनी में लोग पर्सनल कंप्यूटर से पर्सनल कंप्यूटर तक ही बात कर पाते थे।
>> अब आप अपने पर्सनल कंप्यूटर से किसी भी दूरस्थ मोबाइल या फिक्स्डलाइन फोन पर बात कर पाएंगे।
>>इंटरनेट के जरिए लंबी दूरी की बातचीत संभव होने का मतलब है कि एसटीडी की दरों में गिरावट आएगी।