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Personal Finance Personal Finance मुंबई. रियल एस्टेट बाजार में संभावित गिरावट के मद्देनजर देश के तमाम बैंकों ने होम लोन की डाउन पेमेंट बढ़ानी शुरू कर दी है। यानी आपको कर्ज लेने से पहले ज्यादा रकम मकान पर खर्च करनी होगी।
ग्राहकों को झेलना होगा भार :
प्रापर्टी के दाम गिरने पर कर्ज लेने वाले ग्राहकों को ही ज्यादा नुकसान उठाना पड़ेगा, क्योंकि बैंक उनसे ज्यादा डाउन पेमेंट लेकर अपना मार्जिन सुरक्षित कर लेते हैं।
कितनी बढ़ी राशि :
कुछ समय पहले तक कुछ बैंक घर के खरीद मूल्य का ९क् से ९५ फीसदी तक फाइनेंस कर देते थे, जबकि ज्यादातर बैंक ८५ से ९क् फीसदी राशि मुहैया कराते थे। बदले माहौल में ज्यादातर बैंक घर के खरीद मूल्य का ७५ से ८क् फीसदी ही फाइनेंस कर रहे हैं, जिसके चलते उपभोक्ताओं को ज्यादा डाउन पेमेंट जमा करनी पड़ रही है।
बैंक क्यों बढ़ाते हैं मार्जिन?
घर का वास्तविक मूल्य व उसको खरीदने के लिए दिए गए कर्ज की राशि का अंतर बैंकों का मार्जिन होता है। बैंक घर के वास्तविक मूल्य की १क्क् फीसदी राशि कर्ज के तौर पर नहीं देते हैं, ताकि प्रापर्टी के दाम घटने के बावजूद वे अपना मार्जिन बचाए रख सकें। डिफाल्ट की सूरत में बैंक घर की नीलामी करके कर्ज की राशि वसूल सकते हैं। लेकिन कर्ज की बची राशि यदि घर के मूल्य से ज्यादा है, तो उन्हें नुकसान उठाना पड़ता है। ऊंची डाउन पेमेंट उन्हें इस नुकसान से भी बड़ी हद तक सुरक्षा देती है।
सरकारी बैंक भी सख्त : डाउन पेमेंट के मामले में सरकारी बैंक पहले ही सख्त थे, अब और सख्त हो गए हैं। इंडियन बैंक के एक अधिकारी ने बताया कि वे होम लोन के मार्जिन बढ़ाने पर विचार कर सकते हैं।
२५ फीसदी तक मार्जिन
‘हम घर के मूल्य की १५ से २५ फीसदी राशि मार्जिन के तौर पर लेने का प्रयास करते हैं।’
-सुजन सिन्हा उपाध्यक्ष, रिटेल एसेट्स, एक्सिस बैंक
कहां मिल रहा इतना कर्ज
90९क् फीसदी तक कर्ज मिलने की बात पुरानी हो गई है। वर्तमान में औसतन ७५-८क् फीसदी राशि ही फाइनेंस की जा रही है।’
-कमलेश राव,उपाध्यक्ष, पर्सनल फाइनेंस, कोटक महिंद्रा बैंक