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International International कराची. सत्तारूढ़ पीपीपी के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो जरदारी ने सोमवार को कहा कि देश का अगला राष्ट्रपति उनकी पार्टी का ही होगा।
बिलावल निजी यात्रा के तहत सोमवार को दुबई से यहां पहुंचे। उन्होंने स्पष्ट किया कि नया राष्ट्रपति तय करने की प्रक्रिया में वे प्रत्यक्ष रूप से शामिल नहीं हैं। मीडिया के बार-बार पूछने पर उन्होंने उम्मीद जताई कि नया राष्ट्रपति पीपीपी से ही होगा।
जनरल से ‘जनरल’ तक
>> कारगिल में घुसपैठ और भारतीय इलाकों पर कब्जे के लिए।
>> भारत से संबंध सुधारने पर पहल।
>> आतंक पर अमेरिका का साथ।
>> अमेरिका से आर्थिक मदद लेना।
>> अर्थव्यवस्था को उदार बनाना।
राजनीतिक गलतियां
>> नौ साल तक गद्दी पर चिपके रहना।
>> सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को सस्पेंड और हाउस अरेस्ट में रखना, जज बर्खास्त करना।
>> बेनजीर की हत्या ना रोक पाना।
>> पश्चिमी बॉर्डर पर नियंत्रण खोना।
पाक में अब क्या होगा?
>> पाकिस्तान में फिलहाल अमेरिका के खिलाफ बहुत रोष है।
>> इस्लामिक ग्रुप्स का नेशनल असेंबली में तीसरा बड़ा खेमा है।
>> इस्लामिक ताकतें मजबूत होंगी।
>> आईएसआई और मिल्रिटी का सरकार पर दबाव और बढ़ेगा।
>> नए सेना प्रमुख की संभावना।
भारत से रिश्ते
नई सरकार भारत के साथ शांति वार्ता जारी रखने के लिए प्रतिबद्धता जता चुकी है। ऐसे में भारत-पाक के बीच रिश्ते सुधारने की प्रक्रिया के जारी रहने की उम्मीद की जा सकती है।
अमेरिका से संबंध
पाकिस्तान की मौजूदा सरकार और अमेरिका के बीच संबंध अच्छे हैं। यदि अमेरिका को इस बात का भरोसा रहा कि सरकार आतंकवाद को रोकने के पर्याप्त प्रयास कर रही है, तो दोनों देशों के बीच रिश्ते अच्छे बने रहेंगे।
अब क्या होगा मुशर्रफ का?
मुशर्रफ द्वारा इस्तीफे के बाद अब महाभियोग की कार्रवाई तो बेमानी हो गई है, लेकिन सवाल बना हुआ है कि क्या उन पर अन्य मामलों में मुकदमे चलाएं जाएंगे? अभी यह साफ नहीं हो पाया है कि मुशर्रफ ने पद किसी समझौते के तहत छोड़ा है और इस समझौते में उन्हें न्यायिक कार्रवाई से मुक्त करने की बात है अथवा नहीं।
क्या देश छोड़ देंगे : एक सवाल यह भी उठ रहा है कि वे देश में ही रहेंगे या देश छोड़ देंगे? इस पूरे मामले में जिस तरह से सऊदी अरब सरकार ने भूमिका निभाई है, उससे हो सकता है एक दो दिनों में या निकट भविष्य में वे देश छोड़कर चले जाए।
हो सकता है सरकार के साथ उनका इस बात को लेकर समझौता हुआ हो कि राष्ट्रपति पद से इस्तीफा देने पर उन्हें देश से सुरक्षित निकल जाने दिया जाएगा। इस बारे में विदेश मंत्री शाह मेहमूद कुरैशी ने केवल इतनी ही टिप्पणी की है, ‘गठबंधन सरकार का लोकतांत्रिक नेतृत्व निर्णय लेगा कि मुशर्रफ को सुरक्षित बाहर जाने दिया जाए या नहीं।’ गौरतलब है कि इससे कुछ घंटे पहले ही अमेरिकी विदेश मंत्री ने यह कहकर मुशर्रफ को साफ संकेत दे दिए थे कि अमेरिका की ओर से उन्हें कोई ‘शरण’ नहीं मिलेगी।
अगर देश में रहें?
इसमें तीन स्थितियां हो सकती हैं-
1. अगर मुशर्रफ मुकदमों का सामना करते हैं तो उन्हें जेल जाना पड़ सकता है। पाकिस्तान का इतिहास बताता है कि सत्ता से हटाए गए नेताओं के साथ अदालतें नरम बर्ताव नहीं करतीं।
2. अगर किसी समझौते के तहत उनके खिलाफ न्यायिक कार्रवाई नहीं होती है तो एक स्थिति यह भी हो सकती है कि वे देश में राजनीतिक निर्वासन में रहना स्वीकार कर लें।
3. पाकिस्तान मुस्लिम लीग (क्यू) के बैनर तले वे सक्रिय राजनीति में भी भूमिका निभा सकते हैं, लेकिन पीएमएल (क्यू) को देश की जनता ने कभी भी सच्चे मन से स्वीकार नहीं किया, जबकि मुशर्रफ की लोकप्रियता इतनी गिर चुकी है कि निकट भविष्य में वे जनता के बीच जाने की सोच भी नहीं सकते।
सुरक्षा का क्या होगा?
अमेरिकी दबाव में कट्टरपंथियों के खिलाफ कार्रवाई की वजह से मुशर्रफ लंबे अर्से से आतंकियों के निशाने पर रहे हैं। उन पर कई हमले भी हो चुके हैं। अब तक देश के सर्वेसर्वा होने की वजह से वे सुरक्षा के अचूक घेरे में रहते थे, लेकिन राष्ट्रपति पद से हटने के बाद उनकी सुरक्षा पर भी खतरा पैदा हो सकता है।