भोपाल.
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री कमलनाथ ने आरोप लगाया कि राज्य की भाजपा सरकार ने एक संभावनाशील प्रदेश को अंधेरे की ओर धकेल दिया। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में देश का मात्र 1.7 फीसदी निवेश हुआ है, यह उत्तरप्रदेश से भी कम है। निवेश के लिए परस्पर विश्वास का वातावरण होना चाहिए, जो मप्र में नहीं रहा।
निवेश न आने से प्रदेश के नौजवानों के साथ धोखा हुआ है। उन्हें रोजगार के जो अवसर मिलना थे, वो नहीं मिल पाए। उद्योगमंत्री के नाते मुझे इस बात का अफसोस है कि मप्र में अपेक्षित औद्योगिक विकास नही हो पाया।
कांग्रेस और भाजपा सरकार में हुए औद्योगिक विकास के आंकड़ों के बारे में पूछने पर श्री नाथ समाधानकारक जवाब नहीं दे पाए। जब पत्रकारों ने उन पर सवालों की झड़ी लगा दी तो वे उठकर चले गए।
श्री नाथ ने सोमवार को यहां प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में पत्रकारवार्ता में कहा कि देश और प्रदेश में इंवेस्टर्स मीट का नाटक किया गया, लेकिन जिस राज्य में कृषि के लिए ही पर्याप्त बिजली नहीं है, वहां उद्योग के लिए सरकार बिजली कहां से देगी। क्या बिजली के बगैर कोई उद्योग चल सकता है? पिछले साढ़े चार साल में बिजली उत्पादन बढ़ाने के लिए सरकार ने कुछ नहीं किया। यह दुर्भाग्यपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता भाजपा सरकार से जवाब मांगेगी कि उसने कितने रोजगार के मौके दिए, कृषि क्षेत्र में कितनी प्रगति और विकास किया। जिस तरह भाजपा सरकार में भ्रष्टाचार हुआ और किसानों के मान-सम्मान से खिलवाड़ किया गया, जनता उसका जवाब चाहती है।
मैं तो किसी को भी सीएम मानने के लिए तैयार हूं
मुख्यमंत्री प्रोजेक्ट करने के सवाल को उन्होंने यह कहकर टाल दिया कि इस बारे में कोई संकेत देने की जरुरत नहीं है, हमारी लीडरशिप यूनाइटेट है, आप सब 22 अगस्त को छिंदवाड़ा आकर देख लीजिए। जब यह पूछा गया कि सरकार आने पर यह मान लिया जाए कि सुरेश पचौरी ही सीएम होंगे तो उन्होंने कहा, मैं तो किसी को भी मुख्यमंत्री मानने के लिए तैयार हूं।
राष्ट्रहित और किसान हित सर्वोपरि
केंद्रीय उद्योग मंत्री ने कहा कि हमारे लिए राष्ट्रहित और किसानहित सर्वोपरि है, चाहे डब्ल्यूटीओ समझौता टूट जाए। अमेरिका अपने किसानों को तो चालीस फीसदी सबसिडी देती है, लेकिन हमारे किसानों को किसी किस्म की राहत देने को तैयार नहीं है। उनकी नीति इस मामले में दोहरी है, इसलिए हम हमारे किसानों के हित के बगैर कोई समझौता नहीं कर सकते है।
केंद्र की यूपीए सरकार नई कृषि क्रांति लाने पर आमादा है। इसके लिए हमने देशभर के किसानों के लगभग सत्तर हजार करोड़ रुपए के कर्ज माफ करके अपनी नीति और नीयत साफ कर दी है। सोयाबीन का आयात घटाकर हमने अपने किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य देने की कोशिश की है।