नई दिल्ली/रांची. झारखंड में शिबू सोरेन नीत झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) द्वारा समर्थन वापसी के बाद राजनीतिक संकट गहरा गया है।
मुख्यमंत्री मधु कोडा ने जहां एक ओर सदन में बहुमत साबित करने का दावा किया है, वहीं राजग और जेवीएम (पी) ने राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने की मांग की है। 81 सदस्यीय विधानसभा में 29 सदस्यों के साथ भाजपा सबसे बड़ी पार्टी है।
भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष पीएन सिंह ने पार्टी के वरिष्ठ विधायकों और जद यू विधायक राधाकृष्ण किशोर के साथ सोमवार को राज्यपाल सैयद सिब्ते रजी से मुलाकात कर वर्तमान सरकार को बर्खास्त करने की मांग रखी।
उन्होंने कहा कि कोडा को बहुमत साबित करने के लिए समय देने तथा सोरेन को वैकल्पिक सरकार बनाने का मौका देने से बड़े पैमाने पर विधायकों की खरीद-फरोख्त होगी। झारखंड विकास मोर्चा (जेवीएम-पी) के अध्यक्ष तथा पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने राज्यपाल के साथ अलग से मुलाकात कर चुनाव करवाने से पहले राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की है।
इस बीच, चार जदयू विधायकों के समर्थन वाली भाजपा ने सोरेन या कोडा में से किसी को भी समर्थन देने से साफ इनकार कर दिया है। भाजपा के उपाध्यक्ष यशवंत सिन्हा ने कहा कि उनकी पार्टी चुनाव का सामना करना पसंद करेगी।
झामुमो महासचिव हेमलाल मुरमू ने कहा कि फिलहाल पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की यूपीए नेताओं से बात करने दिल्ली जाने की कोई योजना नहीं है।
लालू का टिप्पणी से इनकार
झारखंड मामले में रेलमंत्री और राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने सोमवार को यह कहते हुए टिप्पणी करने से इनकार कर दिया कि अब निर्णय राज्यपाल को करना है। गौरतलब है कि लालू ने रविवार को कहा था कि उन्हें सोरेन के मुख्यमंत्री बनने पर कोई आपत्ति नहीं है।