नई दिल्ली. पाकिस्तान के राष्ट्रपति पद से सोमवार को त्यागपत्र देने वाले परवेज मुशर्रफ का भारत के साथ विशेष नाता रहा है। वे देश में कारगिल संघर्ष और आगरा शिखर वार्ता के खलनायक के रूप में देखे जाते हैं। हालांकि बाद के वषों में भारत के शासक वर्ग से उनका ऐसा समीकरण जमा की पाकिस्तान में भारत को भी मुशर्रफ समर्थकके रूप में देखा जाने लगा। मुशर्रफ का जन्म ही दिल्ली में 11 अगस्त 1943 को हुआ था। दरियागंज इलाके की नाहर वाली हवेली उनकी जन्मस्थली है।
हार का सदमा : मुशर्रफ ने भारत-पाक युद्ध (1965) में हिस्सा लिया। इसमें मिली करारी हार के कारण वे कई दिनों तक सदमे में रहे। वे कमांडो विंग में कंपनी कमांडर के रूप में 1971 के युद्ध केभी साक्षी रहे। इसमें पाकिस्तान के समर्पण की खबर सुनने के बाद मुशर्रफ फूट-फूट कर रोए थे।
कारगिल दुस्साहस : 1998 में तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ द्वारा सेना प्रमुख बनाए जाने के बाद 1999 में मुशर्रफ ने पाकिस्तानी कमांडो को कारगिल पर कब्जा करने को कहा।
अमेरिका के भारी दबाव के बाद पाकिस्तान ने अपने सैनिक पीछे लिए। 8 मई और 14 जुलाई के बीच हुए संघर्ष के कारण मुशर्रफ को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बदनामी का सामना करना पड़ा।
आगरा में अड़े : मुशर्रफ 14-16 जुलाई 2001 को आगरा शिखर सम्मेलन के लिए दिल्ली आए। यहां आने के पहले उन्होंने खुद को पाकिस्तान का राष्ट्रपति घोषित किया। इस यात्रा में वे नाहर वाली हवेली देखने भी गए और अपनी आया अनारो देवी से भी मिले। शिखर वार्ता में मुशर्रफ सीमा पार से आतंकवाद रोकने का कोई उल्लेख करने को तैयार नहीं हुए और बातचीत विफल हो गई। वे शेष यात्रा रद्द कर लौट गए।
सीमा पर तनाव : छह माह बाद ही संसद पर आतंकी हमले के बाद इतना तनाव हो गया कि सीमा पर दोनों देशों की सेनाएं आमने-सामने आ खड़ी हुईं। मुशर्रफ अटलबिहारी वाजपेयी व नवाज शरीफ की लाहौर घोषणा को तो मानते ही नहीं थे, बल्कि समाधान के लिए 1972 के शिमला समझौते को आधार बनाने के लिए तैयार नहीं थे।
दोनों देशों में इतनी कटुता आ गई कि सार्क की एक बैठक इसलिए रद्द हो गई कि वाजपेयी ने मुशर्रफ के साथ बैठने से इनकार कर दिया। काठमांडू में हुई सार्क की एक अन्य बैठक में वाजपेयी ने मुशर्रफ से हाथ मिलाने में उदासीनता दिखाई।
रुख बदला : हालांकि जनवरी 2004 में वाजपेयी की पाकिस्तान यात्रा में इस्लामाबाद समझौते के बाद मुशर्रफ का रुख बदला। मुशर्रफ ने इतिहास बनने की घोषणा तक कर डाली।
मैच का लुत्फ उठाया : मुशर्रफ 16 अप्रैल 2005 को एक बार फिर शांति वार्ता के लिए भारत आए। इस यात्रा में वे अजमेर की दरगाह पर प्रार्थना करने गए और दिल्ली में हुए भारत-पाक क्रिकेट मैच का लुत्फ भी उठाया। इसमें उन्होंने घोषणा की कि दोनों देशों के बीच शांति प्रक्रिया को अब उलटा नहीं जा सकेगा।
विश्लेषकों का कहना है कि 2004 से 2008 की शुरुआत तक भारत व पाकिस्तान ने शांति की दिशा में जितनी प्रगति की उतनी इसके पहले के 56 वर्षो में नहीं हुई।