भोपाल. शहर में चेन लूटने की वारदातों में शामिल लोग ऐसे स्थानों को प्राथमिकता से चुन रहे हैं, जहां की भौगोलिक स्थिति उनके भाग निकलने में सहायक हो। यही वजह है कि भीड़-भाड़ वाले इलाके में लूट की वारदातें कम हो रही हैं। वहीं अच्छी सड़क और अधिक रास्ते वाले स्थान पर इनकी संख्या काफी अधिक है। इस साल की शुरुआत से अब तक शहर में चेन लूटने की 100 से अधिक वारदातें हो चुकी हैं। चेन और मंगलसूत्र झपटने की सबसे ज्यादा वारदातें हबीबगंज, टीटी नगर और गोविंदपुरा थाना क्षेत्र में हुई हैं।
यह वे स्थान हैं, जहां से शाहपुरा, कोलार, चार इमली, एमपी नगर, तुलसी नगर और शिवाजी नगर तक जाने के लिए अनेक रास्ते हैं। चेन खींचने के बाद पलक झपकते ही गायब हो जाने वाले लुटेरे के लिए हबीबगंज के अनेक रास्तों से बच निकलना बेहद आसान है। इसके बाद टीटी नगर थाना क्षेत्र में लिंक रोड, साउथ और नार्थ टीटी नगर, माता मंदिर, सेकंड स्टाप, तुलसी नगर, जवाहर चौक आदि क्षेत्र आते हैं।
यहां से भी अन्य क्षेत्रों तक जाने के लिए अनेक रास्ते हैं। यही स्थिति गोविंदपुरा थाना क्षेत्र की है। यहां से भी लुटेरे का भागना आसान होता है। पुलिस अधिकारी भी इस तथ्य को स्वीकारते हैं। उनका कहना है कि भीड़-भाड़ वाले इलाकों में ऐसी वारदातों की संख्या बेहद कम है। यहां तक कि मेले या अन्य सार्वजनिक आयोजन के दौरान भी चेन लूटने के मामले सामने नहीं आ रहे हैं।
लुटेरा उन जगहों पर ही वारदात करता है जहां भीड़ कम हो और मोटर साइकिल दौड़ाने में आसानी रहे। पुलिस भी अब लूट की वारदातों से परेशान हो चुकी है। लुटेरों को पकड़ने के लिए पुलिस अभी तक तीन बार इनाम घोषित कर चुकी है। यह इनाम लुटेरों को पकड़ने वाली पुलिस टीम को मिला है। इस बार भी लुटेरों पर 10 हजार रुपए का इनाम घोषित है। इनाम के बाद भी वह पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ रहा है। पुलिस भी लुटेरे को पकड़ने के लिए उतनी गंभीर नहीं है, जितनी पहले हुआ करती थी।
वापस भागता है लुटेरा : अधिकतर वारदातों में बाइक सवार लुटेरा महिलाओं के गले से सोने की चेन झपटने के बाद उसी रास्ते से भागा, जिससे वह आया था। वह इस बात का विशेष ध्यान रखता है कि उसके पीछे ऐसा कोई वाहन तो नहीं आ रहा जो उसका पीछा कर सके या फिर वाहन उससे काफी दूरी पर हो। कुछ वारदातों में लुटेरा पीछे से आया और आगे जाकर पलटने के बाद उसने महिला के गले से चेन झपटी। बावजूद इसके लुटेरे का हुलिया अभी तक पुलिस के पास नहीं है।
एक-एक प्रकरण का अध्ययन
इस स्थिति से परेशान पुलिस अब लूट की तमाम वारदातों में एक समान नजर आने वाले तथ्य एकत्रित कर रही है, ताकि उनके आधार पर मोडस आपरेंडी (अपराध करने का तरीका) समझकर लुटेरे तक पहुंचा जा सके।
इन तथ्यों में काली मोटर साइकिल, हेलमेट, तेज गाड़ी चलाने की प्रेक्टिस, शिकार का पीछा करने की बजाय उस पर यकायक धावा करना, अपेक्षाकृत कम भीड़ वाले स्थानों का चयन आदि शामिल हैं। आईजी शैलेंद्र श्रीवास्तव ने भी बीते दिनों हुई ऐसी तमाम वारदातों की फाइलों का अध्ययन शुरू किया है। वे अपराध विशेषज्ञों के संपर्क में भी हैं, ताकि चेन लुटेरे की सोच, व्यवहार के आधार पर उसका सुराग लगाया जा सके। बताया गया है कि पुलिस ने अब पुराने तथा नए शहर के कई वाहन मैकेनिकों पर भी नजर रखना शुरू कर दी है।
चैकिंग प्वाइंट भी बदले
जिन स्थानों पर लूट की अधिक वारदातें हुई है तथा जिन स्थानों से लुटेरों के आने और जाने की संभावना अधिक होती है। उन स्थानों का बारीकी से अध्ययन किया जा रहा है। इन स्थानों पर पुलिस के प्वाइंट और चैकिंग व्यवस्था में भी व्यापक फेरबदल किया गया। कुछ दिन वारदातें रुकी, लेकिन दोबारा शुरू हो र्गई।
शातिर है लुटेरा
लुटेरे को पुलिस की पल-पल की गतिविधियों की जानकारी है। वह पुलिस की चैकिंग व्यवस्था के साथ ही लूट का समय भी बदल देता है। पहले वह शाम और रात में वारदात को अंजाम दे रहा था, लेकिन बाद में उसने दोपहर का समय चूना। पुलिस ने जब रात और दोपहर को व्यवस्थाएं कड़ी की तो लुटेरे ने सुबह घूमने निकलने वाली महिलाओं को अपना निशाना बनाया शुरू कर दिया।