bhaskar Web English
HomeNewsMetrosBhopal Bhopal

साधु संत भी फंसे मोहमाया में

भोपाल. sadhu जनता-जनार्दन को मोहमाया से दूर रहने का शाश्वत ज्ञान देने वाले साधु-संत स्वयं नश्वर मायाजाल से कितने मुक्त हैं, इसका उदाहरण मठ-मंदिर सलाहकार समिति में देखिए। समिति के सदस्य साधु-संतों की मांगें अनंत हैं। इससे शासन-प्रशासन हैरान है।

सदस्य संतगण अपने लिए परिचय-पत्र, लेटर हेड और स्टाफ तो मांग ही रहे हैं, परिचय-पत्र और लेटर हेड के लिए उनकी दिव्य-दृष्टि शासन के मोनो पर भी केंद्रित है। सरकार इसके लिए तैयार नहीं है, क्योंकि अन्य समितियों के सदस्यों को यह पहचान सुविधा प्रदान नहीं की गई है।

संत समुदाय के आपसी समन्वय का हाल यह है कि 31 सदस्यीय इस समिति के 29 साधुओं को दो साधुओं की मौजूदगी फूटी आंख नहीं सुहा रही। चेतावनी दी गई है कि अगर इन्हें बुलाया तो बैठक का बहिष्कार होगा।

नाराजगी का नतीजा
ऐसा माना जाता है कि आला अफसर से नजदीकी और दूरी दोनों ही मुश्किल में डाल सकती है। यानी एक तरफ कुंआ, दूसरी तरफ खाई। मंत्रालय के एक अपर सचिव आरडी साहू इसी अनुभव से दो-चार हैं। जब वे गृह विभाग में थे तो अपर मुख्य सचिव विनोद चौधरी उनसे नाराज हो गए थे और बात बहुत ज्यादा बढ़ गई थी। जैसे-तैसे श्री साहू, गृह विभाग से सामान्य प्रशासन विभाग में तबादले पर जा पहुंचे, मगर रिश्तों की उस खटास ने यहां भी उनका पीछा नहीं छोड़ा। उन्हें अपर सचिव के नाते मिलने वाली सुविधाएं उनसे करीब तीन साल जूनियर को दे दी गई हैं।

सेवानिवृत्ति के संकट
भारतीय पुलिस सेवा के 1975 बैच के विजय रमन, डा. एमपी जार्ज और एचके सरीन को विशेष पुलिस महानिदेशक बनाए जाने का प्रस्ताव अब तक लंबित होने से डा. जार्ज की धड़कनें बढ़ रही हैं। दरअसल, वे इसी महीने सेवानिवृत्त होने जा रहे हैं। इसी सितंबर में होमगार्ड महानिदेशक पीके शर्मा और अक्टूबर में जेल महानिदेशक आनंदराव पंवार की सेवानिवृत्ति है।

अक्टूबर में पुलिस हाउसिंग कारपोरेशन के चेयरमैन रमन कक्कड़, डीजीपी एसके राउत और परिवहन आयुक्त एनके त्रिपाठी महानिदेशक रैंक में बचेंगे। तब 1975 बैच को पदोन्नति की संभावना बनेगी। मगर डा. जार्ज की तब तक विदाई हो चुकी होगी। इस हालत में वे विदाई के बाद सेवानिवृत्त अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक ही कहलाएंगे। इसलिए उन्होंने विशेष पुलिस महानिदेशक रैंक पाने के लिए प्रयास तेज कर दिए हैं। उनकी हरसंभव कोशिशें अपर मुख्य सचिव, मुख्य सचिव और मुख्यमंत्री तक जारी हैं।

डबल ड्यूटी के दर्द
दो-दो जिम्मेदारियां उठाने वाले अधिकारियों यानी विभागाध्यक्ष और मंत्रालय में भी पदेन अफसरों के ग्रहयोग अनुकूल नहीं हैं। शासन ने उनसे मंत्रालय का स्टाफ छीन लिया है। वे इसे वापस पाने के लिए मुख्य सचिव को पत्र लिख रहे हैं। एक पदेन अफसर को तो सामान्य प्रशासन विभाग, विभागाध्यक्ष कार्यालय से जीपीएफ मद में राशि निकालने के मामले में शोकाज नोटिस देने की तैयारी कर रहा है।

पदोन्नति का प्रसाद
कहावत है- ‘सब धान बाईस पसेरी’। एक विभागाध्यक्ष कार्यालय में पदोन्नति का थोक प्रसाद इसी तर्ज पर वितरित करने की तैयारी है। यहां विभागीय अफसर को बतौर संचालक रखने की नीति बन रही है। इसके लिए अपर संचालक स्तर से संचालक पद के लिए प्रमोशन होगा। कवायद ये चल रही है कि जितने भी अपर संचालक हैं, सबको संचालक स्तर पर ले आया जाए। यानी जो 15 साल से अपर संचालक हैं वो भी और जो तीन साल से इस पद पर हैं वो भी। एक साथ ‘पदोन्नत का प्रसाद’ मिले।

युवाओं के साथ
मप्र में पिछले दिनों भाजपा की चुनावी समितियों की बैठकें चलीं। एक बैठक में एक नेता ने युवाओं की तरफ इशारा करते हुए राष्ट्रीय संगठन महामंत्री रामलाल से कहा कि ये सब टिकट के दावेदार हैं। यह सुनकर नौजवान नेता तो सकते में आ गए। उन्हें लगा कि चुनाव लड़ने की दावेदारी करने पर शायद उनकी कुछ खिंचाई हो, मगर हुआ एकदम उलटा। रामलाल ने कहा- मैं तो युवा शक्ति के साथ हूं। संगठन महामंत्री की इस टिप्पणी से नौजवान खुश हुए, वरिष्ठ नेता थोड़े खिसियाए। बाद में नेताओं ने कहा, ‘युवाओं का दिल कोई नहीं तोड़ना चाहता। चुनाव में जीत तो उनके जरिए भी मिलेगी।’

पड़ोसी देश में जाएं
स्वाधीनता दिवस पर भोपाल में स्वराज संचालनालय की पहल पर जश्ने-जम्हूरियत की महफिल सजी। शुभा मुद्गल देशभक्ति के दुर्लभ गीतों का खजाना लेकर आईं, लेकिन पहले एक घंटा चार भाषणों को समर्पित हुआ। वक्ताओं ने भगतसिंह, चंद्रशेखर आजाद, रामप्रसाद बिस्मिल व मदनलाल धींगरा जैसे अमर शहीदों के नाम लिए। बताया गया कि ये देशभक्त कहा करते थे कि उनका अगला जन्म भी इसी पवित्र भूमि पर हो। भाषण संपन्न हुए।

अग्रिम पंक्ति में विराजकर अतिथियों ने आधा घंटा शुभाजी को सुना। दस दफा घड़ी देखी और फिर अगले कार्यक्रम के लिए धीरे से निकल गए। अब द्वितीय पंक्ति में बैठे दो श्रोताओं का वार्तालाप गौरतलब है। एक ने फरमाया कि अगर आज के नेता अगली बार यहीं जन्म लेने की ख्वाहिश जाहिर करें तो पब्लिक ऊपरवाले से यही दुआ करेगी कि इन्हें पड़ोसी देश में अवतार लेने का अवसर दिया जाए। ताकि संसद के यहां जैसे नजारे वहां भी हों। ऐसे में उस देश का भी अल्लाह ही मालिक होगा।

देर आयद, दुरुस्त नहीं
खेल विभाग ने थोड़ी देर कर दी। स्व. केएस राठौर को पिछले दिनों ‘लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड’ से (मरणोपरांत) नवाजा गया। वे प्रदेश और देश के दक्ष घुड़सवार थे, जिन्होंने इस खेल को मप्र में न सिर्फ काफी लोकप्रिय बनाया, बल्कि राष्ट्रीय स्तर के कई तमगे भी हासिल किए। सीतामऊ (मंदसौर) राजघराने के श्री राठौर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक भी रहे, पर घुड़सवारी और अन्य कई खेल उनके जीवन का हिस्सा बने रहे।

विभाग ने उनकी जगह पिछले साल पूर्व मुख्य सचिव आदित्य विक्रम सिंह को यह पुरस्कार दिया। इससे उनका दु:खी होना लाजमी था। उन्होंने अनौपचारिक चर्चाओं में आला अफसरों के समक्ष अपना दर्द भी बयां किया। पिछले दिनों इंदौर में उनके निधन के बाद शायद खेल विभाग को उनकी उपलब्धियां याद आईं और उनके मरणोपरांत अपनी लाज रखी। इसे ‘देर आयद’ तो कहेंगे, लेकिन ‘दुरुस्त’ नहीं।

एक अफसर, कई कामयाबियां
विजय यादव भारतीय पुलिस सेवा के एक दबंग अधिकारी हैं। मध्यप्रदेश मूल के 1987 बैच के आईपीएस अधिकारी श्री यादव को इस साल स्वतंत्रता दिवस पर एक बार फिर वीरता के लिए राष्ट्रपति द्वारा पुलिस पदक से नवाजा गया है। 1994 और 96 में भी उन्हें वीरता पदक मिल चुका है। लोकायुक्त संगठन में अपनी पदस्थापना और उसके बाद लोकायुक्त से टकराव के कारण खबरों में आए श्री यादव अपने कड़क मिजाज के लिए जाने जाते हैं।

गोल्फ के शौकिया खिलाड़ी श्री यादव उन चुनिंदा पुलिस अफसरों में शामिल हैं, जिन्होंने अमेरिकी सेना की कमांडो फोर्स ग्रीन वेरट के साथ प्रशिक्षण प्राप्त किया। वे काउंटर टेरेरिज्म के विशेषज्ञ भी हैं। गौर कीजिए, उन्होंने अंडरवल्र्ड, आतंकवादियों, कुख्यात अपराधियों और डकैतों के विरुद्ध 100 से अधिक मुठभेड़ों का नेतृत्व किया है। श्री यादव के बड़े भाई अजयसिंह यादव भी कड़क मिजाज आईएएस अफसर थे और उन्होंने वीआरएस लेकर समाजसेवा को चुना।

सत्रह में सर्वोत्तम त्रिपाठी
पुलिस महानिदेशक एसके राउत और परिवहन आयुक्त एनके त्रिपाठी का नाम केंद्र सरकार के पुलिस महानिदेशक पद की सूची में शामिल कर लिया गया है। देशभर से 1974 बैच के चुनिंदा सत्रह अधिकारियों में सर्वोत्तम रिकार्ड श्री त्रिपाठी का पाया गया है। इससे जाहिर है कि इनमें से जिस अफसर को दिल्ली में बेहतर पद मिलेगा, वह तुरंत चला जाएगा। इस वजह से खाली होने वाले महत्वपूर्ण पद को पाने के लिए अन्य अधिकारियों ने अभी से जोड़-तोड़ तेज कर दी है। अब देखना है कि भविष्य में प्रदेश के पुलिस प्रमुख का पद खाली होता है या फिर परिवहन आयुक्त का।

दावेदारों का दंभ
कांग्रेसी कार्यकर्ता और नेता विधानसभा के टिकट की खातिर दिल्ली से भोपाल तक दौड़ लगा रहे हैं। पार्टी हाईकमान हो या वरिष्ठ नेता, सबकी चौखट पर मत्था टेक जारी है। ये टिकटार्थी जीतने का दंभ जमकर भर रहे हैं। भोपाल की एक सीट पर ‘एक अनार सौ बीमार’ की स्थिति है। यहां से अखंड विजय ध्वज फहराने वाले बाबूलाल गौर को पटखनी देने के लिए कांग्रेस के कई नेता क्षेत्र में चक्कर काट रहे हैं। अब तो सार्वजनिक कार्यक्रमों में इन नेताओं के दावे सुनाई दे रहे हैं। सबका दावा गौर को हराने का है। स्वतंत्रता दिवस की संध्या पर राजभवन में आयोजित कार्यक्रम में एक महिला कांग्रेस नेता का ऐसा ही बड़बोलापन सुनने को मिला।





अपने विचार यहां लिखें
नाम:
ईमेल आईडी:
भाषा चुनॆ
हिन्दी रॊमन‌ हिन्दी फॊनॆटिक English
विचार:
कोड: