भोपाल. दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रीयल कॉरीडोर (डीएमआईसी) के जरिए मध्यप्रदेश में चालीस हजार करोड़ रुपए के निवेश की उम्मीद बंध गई है। इस काम के लिए एक कंसल्टेंसी कंपनी को सर्वे का जिम्मा भी सौंप दिया गया है। योजना से जुड़े जानकारों का कहना है कि इस कॉरिडोर को पूरा होने में दस वर्ष तक का समय लग सकता है।
सूत्रों के अनुसार केंद्र सरकार की 1483 किलोमीटर लंबी इस औद्योगिक योजना से मप्र में पूंजी निवेश के साथ विकास की संभावनाएं भी बढ़ जाएंगी। इसमें औद्योगिक उत्पाद की ढुलाई के लिए विशेष रूप से सड़क मार्ग बनाया जाएगा।
इसके चलते दिल्ली से मुंबई के बीच आने वाले प्रदेशों के औद्योगिक क्षेत्रों के उत्पाद को शीघ्रता से एक शहर से दूसरे शहर पहुंचाया जा सकेगा। इस योजना पर अमल करने से दिल्ली और मुंबई के बीच आने वाले राज्यों में हरियाणा, राजस्थान, मप्र, गुजरात और महाराष्ट्र के औद्योगिक विकास में मदद में मिलेगी। इन प्रदेशों में निवेश होगा और क्षेत्रीय विकास के साथ रोजगार के अवसरों में वृद्धि होगी।
औद्योगिक विकास को मिलेगी गति : राज्य शासन ने डीएमआईसी पर अमल के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर लीजिंग एंड फाइनेंशियल सर्विसेज (आइएलएफएस) नामक कंपनी को प्रदेश के उन क्षेत्रों की पहचान करने का जिम्मा सौंपा गया है, जहां औद्योगिक विकास की संभावना है।
ये होंगी संभावनाएं
प्रदेश में तीन महीने से काम कर रही है आईएलएफएस इस बात का सर्वे करेगी कि कहां, कौन सा उद्योग लगाया जा सकता है, क्या दिक्कतें आ सकती हैं और उन्हें कैसे दूर किया जा सकता है।
कंपनी अपने सर्वे के साथ निवेशकों के लिए प्रदेश से जुड़ी कॉरिडोर की पूरी योजना को बाजार में प्रस्तुत करेगी ताकि पूंजी निवेश हो सके। पूंजी लगाने वालों को आकर्षित करने के साथ उन्हें राज्य में लाने का काम भी कंसल्टेंट कंपनी करेगी। उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने भी आईएलएफएस को अपना कंसल्टेंट बनाया है।