भोपाल. खुले घरों में रहना पसंद करने वाले भोपालवासियों को अब फ्लेट में रहने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। इसके पीछे नई आवास नीति कारण है।
नई आवास नीति के चलते पिछले चार माह में एक भी नई कालोनी विकसित करने की अनुमति का आवेदन नगर निगम में नहीं आया है। जबकि फ्लेट बनाने के लिए पांच प्रतिशत आवेदन अब भी प्राप्त हो रहे हैं।
नई आवास नीति ने शहर का स्वरूप बदलने की शुरुआत कर दी है। आवास नीति में 40 बीघा से कम भूमि पर कालोनी नहीं विकसित करने के प्रतिबंध ने बिल्डरों को अब शहर में फ्लेट बनाने के लिए मजबूर कर दिया है।
आवास नीति में इस बात का उल्लेख है कि यदि कालोनाइजर को कालोनी बनाना है तो उसके पास कम से कम 8 हेक्टेयर यानी 40 बीघा भूमि होना अनिवार्य है। जबकि ग्रुप हाउसिंग यानी फ्लेट बनाने हैं तो उसके लिए 2 हेक्टेयर यानी 10 बीघा जमीन होना ही पर्याप्त है।
वर्तमान में शहर के हालात यह हैं कि यहां कालोनाइजर के पास इतनी भूमि मौजूद नहीं है कि वे नई कालोनी विकसित कर सकें। ऐसी स्थिति में नगर निगम के पास नई कालोनी विकसित करने की अनुमति के लिए आवेदन आना बंद हो गए हैं। जबकि फ्लेट बनाने के लिए लगभग एक दर्जन से अधिक अनुमतियां आ चुकी हैं।
नई आवास नीति जारी होने से पहले तक शहर के 80 प्रतिशत लोग डुपलेक्स में रहना और 15 प्रतिशत लोग स्वयं का मकान बना कर तथा शेष 5 प्रतिशत लोग ही फ्लेट में रहना पसंद करते हैं।
नई आवास नीति के कारण शहर के समुचित विकास में हो रही बाधा पर नगर निगम विचार कर रहा है एक प्रस्ताव तैयार कर जल्द ही शासन को भेजा जाएगा।
-सुनील सूद, महापौर
नई आवास नीति कालोनी बनाने के लिए 40 बीघा भूमि का प्रतिबंध होने से डुपलेक्स बनना बंद हो गए हैं इसलिए एक बार फिर फ्लेट का बाजार जोर पकड़ सकता है। संशोधन पर पर विचार चल रहा है।
-अमोघ गुप्ता, आर्किटेक्ट