इंदौर. स्वर्ण जयंती रोजगार स्वरोजगार योजना के आवेदन पत्र (फॉर्म) को लेकर जमकर मारामारी मची है। नगर निगम ने शहर के 86 हजार गरीबी रेखा के नीचे (बीपीएल) जीने वाले परिवारों के लिए आठ हजार फॉर्म उपलब्ध कराए हैं यानी औसतन 11 परिवारों पर एक।
इनका वितरण पार्षदों और निगम के राजनीतिक पदाधिकारियों के माध्यम से हो रहा है। योजना का मकसद बैंकों के माध्यम से ज्यादा से ज्यादा बीपीएल परिवारों को लोन देकर स्वरोजगार की व्यवस्था करना है लेकिन फॉर्म ही जरूरतमंद लोगों को नहीं मिल रहे हैं। ऐसे में परेशान लोग जनप्रतिनिधियों या अफसरों के चक्कर काट रहे हैं।
मालवीयनगर निवासी अजय कुशवाह ने बताया दो साल बाद भी फॉर्म नहीं मिला। विकासनगर के विकास सिरसिया और राजमोहल्ला क्षेत्र के राजेश वर्मा के अनुसार पार्षद अपने से ताल्लुक रखने वालों को ही फॉर्म बांटते हैं।
गलती निगम प्रशासन की
पार्षदों का कहना है गलती निगम प्रशासन की जिसने आवश्यकता से ९क् फीसदी कम आवेदन छपवाए। एमआईसी सदस्य मुन्नालाल यादव ने बताया ५,२क्क् परिवारों के लिए ९६ फॉर्म मिले थे। प्रभारी को बार-बार शिकायत की तो २५ और मिल गए।
पार्षद सुरजीतसिंह चड्ढा को भी 2,200 परिवारों के लिए ३८ फॉर्म मिले। जयदीप जैन और के.के.यादव ने कहा कुल बीपीएल परिवारों से चौथाई फॉर्म मिलना चाहिए। लोगों को लोन मिले न मिले संतुष्टि तो मिलेगी।
यही है राजनीति
सूत्रों के अनुसार निगम ने पहले ८ हजार फॉर्म छपवाए थे जिनमें ५क्क् महापौर प्रतिनिधियों, एक हजार अंत्योदय समिति सदस्यों और करीब इतने ही जोन प्रभारी-एल्डरमैन को दे दिए। उसके बाद बचे फॉर्म में से हर पार्षद को ३५ से ९५ ही मिले।
फॉर्म की मारामारी की बात सही है लेकिन इसके लिए निगम जिम्मेदार नहीं। योजना का वार्षिक लक्ष्य तय रहता है। जिला योजना विभाग से निगम को जितने फॉर्म मिलते हैं उतने बांट देते हैं। पार्षदों की मांग पर वितरण उनसे ही कराते हैं।
- नीरज मंडलोई, निगमायुक्त