इंदौर.
800 फीट गहरी खाई, भयावह जंगली जानवर, सांय-सांय करती अंधेरी रात और झरने से गिरते पानी की कलकल।
इसी में 400 फीट नीचे फंसा युवक, जो चट्टान छोड़ दे तो सीधे मौत के मुंह में। नीचे उसकी घबराहट और ऊपर लोगों की। रविवार शाम 6.30 बजे फंसे इस युवक को पांच घंटे बाद फायर ब्रिगेड के बचाव दल और गांववालों ने जान जोखिम में डालकर निकाला।
दिल को झकझोर देने वाला यह वाकया रविवार शाम तक्षशिला कॉलोनी निवासी प्रदीप शर्मा के साथ हुआ। वे बहनोई गिरीश असेरिया, दोस्त कमल तंवर और प्रतीक के साथ पिकनिक के लिए तिंछाफाल गए थे। सभी ने खाना खाया और खाई किनारे मौज-मस्ती करने लगे। इसी दौरान प्रदीप का पैर फिसला और खाई के मुहाने पर पहुंच गया। वह और दोस्त चिल्लाते तब तक वह घास की फिसलन से खाई में जा गिरा। यह देख दोस्त रो पड़े। रैलिंग नहीं होने से कोई किनारे जाकर देखने की हिम्मत भी नहीं जुटा पाया।
एक से दूसरे पेड़ पर लुढ़कता गया
उधर, प्रदीप पचास फीट नीचे पेड़ पर अटका। बचाव के लिए टहनी पकड़ी, जो टूटी और दूसरे पेड़ पर जा गिरा। वहां कोई टहनी पकड़ता उससे पहले ही लुढ़कते हुए करीब 400 फीट नीचे एक झाड़ी व चट्टान के बीच फंसा और बेहोश हो गया। इस बीच साथियों ने फायर ब्रिगेड को सूचना दी। तब तक कुछ गांव वाले भी पहुंचे। सैकड़ों फीट गहरी खाई में झांककर देखने का कोई साधन नहीं होने से सब बेबस थे।
रास्ता नहीं मिला खाई में घुसने का
करीब 8.30 बजे फायर ब्रिगेड का बचाव दल पहुंचा लेकिन अंधेरा होने से उलझन में पड़ गया। उधर, आधे घंटे बाद प्रदीप को होश आया लेकिन अंधेरे में पता नहीं लगा कहां है। उसने मदद के लिए पुकारा लेकिन आवाज ऊपर नहीं पहुंची।
खाई में उतरने का कोई रास्ता नहीं होने से दमकलकर्मियों की फजीहत हो गई। प्रभारी कैलाशसिंह डांडे और बलजीतसिंह हुड्डा ने डीआईजी सुरेश शर्मा व एसपी बीएल गंधर्व को फोन पर जानकारी दी तो उन्होंने कहा गांववालों की मदद लें। कहीं से भी रास्ता हो तो खाई में जाकर बचाएं।
गांववालों ने दिखाई हिम्मत
इसी दौरान गांव के जीतेश और रितेश नागर ने बताया यों तो खाई तीस किलोमीटर लंबी है लेकिन एक किमी दूर एक रास्ता है। वहां से उतरकर जहां प्रदीप फंसा है आना होगा। सैकड़ों फीट उतरना होगा। रास्ता पथरीला, उबड़-खाबड़ व खतरनाक है। खाई में तेंदुए, लकड़बग्घे व जंगली जानवर भी हैं। एक हफ्ते ही पहले तेंदुए ने बकरी का शिकार किया था।
ड्यूटी बियांड ड्यूटी
‘हमें प्रदीप को जिंदा निकालना है, यही हमारी ड्यूटी है।’ यह कहकर श्री डांडे व श्री हुड्डा ने दमकलकर्मी विजयशंकर, नीलेश, गौतम व सूर्यवंशी के साथ दो दल बनाए। एक दल ऊपर रस्सी लेकर खड़ा हो गया और दूसरे दल में श्री डांडे व श्री हुड्डा गांववालों को लेकर एक किलोमीटर दूर के रास्ते से खाई में उतरे। उनके हाथ में टार्च, रस्सी, लाठी आदि थे। खाई के जंगलों में वे करीब चार सौ फीट उतरे और प्रदीप के गिरने की दिशा में बढ़े।