जयपुर. मीटर खराबी के बढ़ते मामलों व पुशफीट मीटर के डिस्प्ले आउट होने की शिकायतों से परेशान बिजली कंपनी के आला अधिकारी उपखंडों में तैनात इंजीनियरों पर ही शक करने लगे हैं।
अब डिस्प्ले आउट होने वाले मीटरों को बदलने या जांचने व बिल में राशि कम करने के मामले पर एईएन व जेईएन को विजिलेंस विंग के अधिकारियों को सूचित करना होगा। उनकी जांच के बाद ही मीटर बदलने की कार्रवाई होगी।
कंपनी ने पिछले एक साल में डेढ़ लाख से ज्यादा पुशफीट मीटर बदले हैं। नए लगाए मीटरों के डिस्प्ले आउट होने व तेज चलने की समस्या को लेकर आए दिन उपभोक्ता व इंजीनियरों के बीच झड़पें हो जाती हैं तथा बिलों में काट-छांट करनी पड़ रही है।
इस पर आला अधिकारियों को शक है कि कहीं जेईएन, एईएन या कर्मचारी उपभोक्ता की मिलीभगत से डिस्प्ले आउट व मीटर तेज चलने के नाम पर बिलों में राशि कम करने की गड़बड़ तो नहीं कर रहे हैं, इसलिए एईएन व जेईएन को हिदायत दी गई है कि ऐसे मीटरों की विजिलेंस विंग से जांच करवाने के बाद बदलने व बिलों में राशि कम की जाए।
सूत्रों का कहना है कि पिछले दिनों इंजीनियरों व मीटर कंपनी के अधिकारियों के बीच बैठक हुई थी। इसमें एईएन, जेईएन व कर्मचारियों ने मीटर कंपनी के अधिकारियों की जमकर खिंचाई की। इससे नाराज मीटर कंपनी के अधिकारियों ने आला अधिकारियों से जेईएन व एईएन की शिकायत कर दी तथा उन पर उपभोक्ता से मिलीभगत का आरोप लगा दिया। इस पर बिजली कंपनी ने डिस्प्ले आउट व खराब मीटरों की विजिलेंस चेकिंग के बाद ही बदलने का आदेश जारी कर दिया।
जयपुर जोन के चीफ इंजीनियर सीपी अग्रवाल का कहना है कि मुझे इस बारे में जानकारी नहीं है। सीएमडी ही बता सकते हैं। वहीं विजिलेंस विंग (जयपुर शहर) के एक्सईन आर.के. मीणा ने बताया कि हमें एसई का आदेश मिला है, जिसमें डिस्प्ले आउट मीटरों को जांचने व भौतिक सत्यापन करने को कहा गया है। हम आदेशों का पालन कर रहे हैं।
20 फीसदी मीटरों के डिस्प्ले आउट
मीटर रीडरों का कहना है कि नए लगाए जा रहे मीटरों में से 20 फीसदी से ज्यादा मीटरों के डिस्प्ले आउट व खराब हैं। इससे रीडिंग भी नहीं ले पाते हैं। जेईएन व एईएन को महीने के 10 दिन तो कार्यालय में बैठकर बिलों की गलती सुधारनी पड़ती है।
राजस्थान विद्युत मीटर रीडर एवं एंप्लॉईज यूनियन के कार्यकारी महासचिव डीडी शर्मा का कहना है कि बिजली मीटर घटिया आ रहे हैं। आला अधिकारी मीटर कंपनी के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय कर्मचारियों तथा इंजीनियरों पर शक कर रहे है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है। मीटरों की खरीद की जांच होनी चाहिए।
उपभोक्ता की जेब ढीली
मीटर के डिस्प्ले आउट या खराब होने पर मीटर रीडर रीडिंग नहीं ले पाते हैं। ऐसे में पिछले छह महीने के उपभोग या फिर पिछले साल उसी महीने के अनुसार औसतन बिलिंग होती है। इससे पहले से कम बिजली खर्च करने वाले उपभोक्ता को भी ज्यादा बिल देना पड़ता है। मीटर धीरे चलने पर उपभोक्ता से पिछले छह महीने की राशि का एरियर जोड़कर वसूली जाती है। इससे उपभोक्ता का बजट गड़बड़ा जाता है।