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बापू मेरा इकलौता बेटा लौटा दो

ग्वालियर. संत आसाराम बापू पर गुजरात और छिंदवाड़ा के बाद अब ग्वालियर में भी गम्भीर आरोप लगने लगे हैं।

यहां कांच मिल क्षेत्र में रहने वाले सेवानिवृत सूबेदार मेजर भारत सिंह भदौरिया ने संत आसाराम बापू पर उनके इकलौते पुत्र को सम्मोहित कर बंधक बनाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि उनका बेटा चंडीगढ़ के आश्रम में है, लेकिन उन्हें न तो मिलने दिया जाता है और न ही फोन पर बात कराई जाती है।

श्री भदौरिया ने दैनिक भास्कर को बताया कि उनके पुत्र ज्ञान सिंह को वापस लाने के लिए उनके परिवार का हर सदस्य गुजरात में आसाराम बापू से मिलने गया, लेकिन बापू के सुरक्षा दस्ते ने धक्के देकर भगा दिया। भदौरिया परिवार के सदस्यों का कहना है कि राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से मिलना आसान है लेकिन आसाराम बापू से मिलना मुश्किल है। सूबेदार मेजर भदौरिया ने बताया कि 1996 में संत आसाराम बापू का पहली बार ग्वालियर में सत्संग हुआ था।

इस सत्संग को सुनने मेरा बेटा ज्ञान सिंह भी गया था। बापू ने बीच सत्संग में उनके बेटे को खड़ा करके उसका नाम पूछा और कहा कि तुम अपने नाम के अनुसार काम करो। यह कहते हुए उसे खाने को एक फल दिया। उसी दिन से ज्ञान सिंह भ्रमित-सा हो गया। वह छह माह शिवपुरी लिंक रोड स्थित बापू के आश्रम में रहा। इसके बाद वह दूसरे आश्रम में चला गया।

तस्वीर को बांध रही है राखी
श्री भदौरिया ने बताया कि 12 साल से उनकी बेटी सुमन ज्ञान सिंह की तस्वीर पर राखी बांध रही है। न जाने वह दिन कब आएगा, जब उनकी बेटी साक्षात ज्ञान सिंह की कलाई पर राखी बांधेगी। यह कहते हुए भारत सिंह भदौरिया का गला भर आया।

चिंतित है परिवार
आसाराम बापू के गुजरात और छिंदवाड़ा के आश्रम में पिछले दिनों चार बच्चों की मौत की खबर सुनने के बाद भदौरिया परिवार चिंतित व भयभीत है। श्री भदौरिया का कहना है कि उनके परिवार को यह डर है कि उनके इकलौते बेटे के साथ भी कहीं ऐसा न हो जाए। यदि उनके बेटे को कुछ हो जाता है तो वह आसाराम बापू के खिलाफ मामला दर्ज कराएंगे।

श्री भदौरिया ने आसाराम बापू से जानना चाहा है कि यदि ज्ञान के मां-बाप की मौत हो जाती है तो वह उसे (ज्ञान सिंह) उनकी चिता को मुखाग्नि देने भेजेंगे या नहीं। संत आसाराम और उनका बेटा जब गृहस्थ जीवन बिता रहे हैं तो फिर अपने शिष्यों को शादी करने से क्यों रोकते हैं?

मां-बाप को भूलने की कैसी शिक्षा
सेवानिवृत सूबेदार मेजर का कहना है कि वेद-पुराणों में भगवान से बढ़कर माता-पिता को बताते हुए उनकी सेवा करने की शिक्षा दी गई है। बापू के आश्रम में युवाओं को यह कैसी शिक्षा दी जा रही है कि मां-बाप को भूल जाओ सिर्फ बापू की सेवा करते रहो।





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