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Chhattisgarh
Raipur Raipur रायपुर.
छत्तीसगढ़ पुलिस ने बस्तर के धुर नक्सल इलाकों में हेलिकाप्टर तलाशने के लिए पूरी ताकत झोंक दी। बस्तर में जिस इलाके से हेलिकाप्टर के लापता होने का अंदेशा है, उसके आसपास 25 थानों की फोर्स सर्चिग में लगा दी गई।
सीआरपीएफ, सीएएफ और एसटीएफ के साथ एसपीओ को मिलाकर 12600 जवान भी सर्चिग में लगे हैं। पुलिस और एयरफोर्स को मिलाकर पांच हेलिकाप्टरों ने 100 घंटे से ज्यादा उड़ान भरी है, लेकिन लापता हेलिकाप्टर नजर नहीं आया।
राज्य में अब तक के सबसे बड़े तलाशी अभियान में फोर्स की कामयाबी सिर्फ इतनी है कि 4 अगस्त की सुबह से 17 अगस्त की रात तक सर्चिग एरिया 18 हजार वर्ग किमी से सिकुड़कर 8 हजार वर्ग किमी रह गया। लेकिन बचा हिस्सा और दुर्गम है। बारिश या खराब मौसम की वजह से विजिबिलिटी (नजर आने वाली दूरी) 20 फीट से ज्यादा नहीं है। डीजीपी विश्व रंजन ने बताया कि इसी वजह से हेलिकाप्टर की खोजबीन का काम बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
हैदराबाद से जगदलपुर आ रहा रैन एयर (रैनबेक्सी ग्रुप से संबद्ध) का हेलिकाप्टर बेल-430 पायलट समेत चार लोगों के साथ 3 अगस्त को शाम 4.30 बजे हैदराबाद से उड़ा। 16 नाटिकल माइल्स (करीब 60 किमी) की उड़ान के बाद एटीसी से इसका संपर्क टूट गया। इसे जगदलपुर से फ्यूल लेकर छत्तीसगढ़ के गृहमंत्री रामविचार नेताम को लेने अंबिकापुर जाना था।
तलाशी में जुटी तमाम एजेंसियों को शक है कि हेलिकाप्टर छत्तीसगढ़-आंध्रप्रदेश की सीमा या इससे लगे बस्तर के जंगलों तक पहुंच गया होगा। इसलिए तलाशी की जद्दोजहद इसी इलाके में चल रही है। रिमोट सेंसिंग उपकरणों ने फोर्स को हेलिकाप्टर के जो दो संभावित लोकेशन दिए थे, उनमें से एक में नक्सलियों के स्मारक मिले और दूसरी जगह ट्रैक्टर तथा पुलिस की जेसीबी।
अलग फ्लाइट पाथ पर था
तलाशी अभियान छेड़ने से पहले 4 तारीख को फोर्स ने सबसे पहले पता लगाया कि रूट क्या था। खुलासा हुआ कि हेलिकाप्टर हैदराबाद से जगदलपुर के नार्मल फ्लाइट पाथ यानी खम्मम, भद्राचलम और कोंटा होकर उड़ा ही नहीं। डीजीपी ने बताया कि हेलिकाप्टर ने सीधा और शार्टकट हवाई मार्ग अपनाया, जो घने जंगलों और ऊंची पहाड़ियों से गुजर रहा था।
30 किमी के थाने एलर्ट
हेलिकाप्टर को जिस हवाई मार्ग से जगदलपुर आना था, छत्तीसगढ़ में उस मार्ग से 30-30 किमी दूरी तक दोनों ओर के थाने एलर्ट किए गए और पुलिस को सर्चिग में लगाया गया। अगले दिन हवाई सर्चिग तीन हेलिकाप्टरों से शुरू हुई। इनमें एयरफोर्स और रैन एयर के अलावा छत्तीसगढ़ तथा मध्यप्रदेश के हेलिकाप्टर लगाए गए। इन हेलिकाप्टरों ने हैदराबाद, जगदलपुर, दंतेवाड़ा और वारंगल हवाई पट्टियों से उड़ान भरी।
नक्सल हमले, भूस्खलन
एडीजी इंटेलिजेंस गिरिधारी नायक और दंतेवाड़ा एसपी राहुल शर्मा के मुताबिक 5 से 8 अगस्त के बीच बीजापुर और आसपास के जंगलों में घुसे गश्तीदलों पर नक्सलियों ने तीन अलग-अलग जगह फायरिंग की। फोर्स ने हमले नाकाम कर दिए। तब बस्तर आईजी एएन उपाध्याय ने निर्देश दिए कि सर्चिग के लिए जंगलों में घुसनेवाले दस्तों में अत्याधुनिक हथियारों से लैस 200 या ज्यादा जवान होने चाहिए। आकाशनगर (बचेली) में भारी वर्षा और बड़े भूस्खलन ने भी खोजबीन को बुरी तरह बाधित किया।
एक करोड़ का फ्यूल
फोर्स ने अब तक मैदानी स्तर पर तलाशी में खर्च का आंकलन नहीं किया है। डीजीपी श्री रंजन ने बताया कि हवाई सर्चिग में एविएशन फ्यूल और राज्य के हेलिकाप्टर के किराए को मिलाकर 1 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च हो गए हैं। इसमें एयरफोर्स और रैन एयर का खर्च शामिल नहीं है। तलाशी में लगे सुरक्षा बलों के खर्च का आंकलन बाद में होगा। यह भी करोड़ों में रहेगा।
सबसे बड़ा अभियान
कुल क्षेत्रफल ------ 18000 वर्ग किमी
कुल जवान ------- 12600
कुल उड़ानें करीब --- 100 घंटे
इस्तेमाल हेलिकाप्टर - पांच (एयरफोर्स समेत)
इस्तेमाल एयरबेस -- चार
थाने एलर्ट ------- 25
सीएम ने की समीक्षा
मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह और मुख्य सचिव पी. जाय उम्मेन ने हेलिकाप्टर की तलाशी के लिए चलाए जा रहे अभियान की समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने डीजीपी को निर्देश दिया कि तलाशी अभियान के लिए जमीनी स्तर पर पुलिस को और सक्रिय किया जाए। उन्होंने हेलिकाप्टर की खोज के लिए विश्व में मौजूद उच्चस्तरीय तकनीक का भी इस्तेमाल करने के निर्देश दिए।