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Chhattisgarh
Bilaspur Bilaspur बिलासपुर. जिले के तीन अलग-अलग इलाकों में हर्बल फारेस्ट व बेंबू सेटम बनाने की योजना वन विभाग ने बनाई है। यहां विभिन्न प्रजातियों के करीब सवा लाख पौधे लगाए जाएंगे। इस पर 52 लाख रुपए खर्च होंगे।
वन विभाग की मदद से सामाजिक वानिकी विभाग द्वारा ग्राम सागर व सिंघरी के बीच नदी किनारे दस हेक्टेयर भूमि में एक लाख मेहंदी के पौधे लगाए जाएंगे। इसके लिए शासन से दस लाख रुपए की स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है, जबकि वहां मंगलवार से प्लांटेशन शुरू भी होने जा रहा है। पौधे से पौधे की दूरी एक फीट जबकि क्यारियों के बीच आपस की दूरी डेढ़ फीट रहेगी। इससे पौधों के विकास में मदद मिलेगी और यह जल्दी पेड़ के रुप में विकसित होंगे। नदी क्षेत्र में गड्ढे खोदने का काम पूरा कर लिया गया है, जबकि कल पौधे भी वहां पहुंच जाएंगे। इसके बाद पौधे रोपने का काम शुरू हो जाएगा।
वन विभाग द्वारा डीआरडीए को दो और योजनाओं के लिए प्रस्ताव भेजा गया है, जिसमें ग्राम बेलटुकरी के पास नदी किनारे हर्बल फारेस्ट तैयार करने व खूंटाघाट के पास बेबू सेटम तैयार करने की योजना शामिल है। जानकारी के मुताबिक बेलटुकरी के पास नदी किनारे 32 एकड़ भूमि में औषधि गुणों वाले तकरीबन 15 से 20 हजार पौधे लगाए जाएंगे। इसके अंतर्गत हर्रा, बहेरा, आंवला, तुलसी, लेमनग्रास सहित अन्य पौधे रोपे जाएंगे।
इस योजना पर 32 लाख रुपए खर्च किए जाएंगे। खूंटाघाट बांध के पास वन विभाग द्वारा पर्यावरण वानिकी के किनारे विश्व में मिलने वाली 25 प्रजातियों के बांस के पौधे लगाए जाएंगे। दस लाख रुपए की लागत वाली यह योजना बेंबू सेटम के नाम से जानी जाती है। बांस के पौधे मंगाने के लिए वन विभाग के अधिकारियों द्वारा असम राज्य से संपर्क किया जा रहा है। संपर्क होने के बाद पौधों का आर्डर दे दिया जाएगा। इस योजना के लिए भी दस लाख रुपए खर्च किए जाएंगे।
हर्बल फारेस्ट तैयार करने के लिए योजना बना ली गई है। औषधि तैयार करने के बाद इनकी बिक्री की जाएगी। इससे शासन को राजस्व मिलेगा।
—एसडी बड़गैया, डीएफओ, वन विभाग बिलासपुर
एक साल से तैयार हो रहे है मेहंदी के पौधे
केंद्रीय रोपिणी सकरी में जुलाई 2007 से मेहंदी के एक लाख पौधे तैयार हो रहे हैं। वन विभाग ने दो बोरा बीज रोपिणी को उपलब्ध कराया था। इसके बाद पहली बार कर्मचारियों ने मेहंदी के पौधे उगाने का काम शुरू किया।
जानकारों का कहना है कि बड़ी मुश्किल से मेहंदी के पौधे तैयार होते है। बीज अंकुरण में ही 40 से 45 दिन लग जाते हैं, जबकि एक साल बाद पौधा रोपने लायक होता है। रोपिणी में पौधे अब रोपने लायक तैयार हो चुके हैं।