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Chhattisgarh
Bilaspur Bilaspur बिलासपुर. भाजपा सरकार द्वारा किसानों को तीन फीसदी ब्याज में ऋण देने की घोषणा यह प्रतिक्रिया किसानों की है। गरीबों को राशन कार्ड देने की बात हो या फिर रोजगार गारंटी योजना का लाभ मिलने का मामला हो किसानों में इसे लेकर असंतोष है। अनपढ़ व भोले-भाले किसान ही नहीं पढ़े-लिखे कृषक भी इस घोषणा को चुनावी हवा का झोंका बता रहे हैं।
दैनिक भास्कर ने सोमवार को कुछ किसानों से चर्चा की। परसदा निवासी छहुरा यादव ने कहा कि साढ़े चार साल में किसानों के लाभ व नुकसान की याद सरकार को नहीं आई और जब चुनाव नजदीक आ गया है, सरकार बड़ी-बड़ी घोषणा कर रही है। यह चुनावी दाव है, जिसे जानबूझकर अभी खेला गया है। देवरी खम्हरिया निवासी भरतलाल कौशिक ने कहा कि खाद व बीज तो ठीक से सहकारी समितियों में मिल नहीं रहा है और जब चुनाव पास आ रहा है, सरकार तीन रुपए ब्याज में ऋण देने की बात कह रही है।
सरकार को किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की योजना तैयार करनी चाहिए, न कि ब्याज राशि में कमी करके ऋण लेने प्रोत्साहित। सरकार को कुछ दिनों लिए चुनाव को भूलकर खाद की कमी को दूर करने के बारे में सोचना चाहिए। सकरी निवासी विदेशी यादव ने कहा कि ब्याज में छूट मिलने से बड़े किसानों को तो फायदा मिल सकता है, लेनिक छोटे किसान इसके लाभ से वंचित रहेंगे। उन्हें ज्यादा ऋण लेना नहीं पड़ता।
वैसे भी अधिकांश किसान ऋण ले चुके हैं। जब तक योजना लागू होगी, पता नहीं किस पार्टी की सरकार बन जाए। गांव में मजदूरी नहीं मिलने पर सकरी आए हाफा निवासी सुंदर केंवट, समेलाल कौशिक और बुगल सिंह भरद्वाज ने सरकार की घोषणा को छलावा करार दिया है। बुगल ने कहा कि चाहे किसी भी पार्टी की सरकार बने किसानों को न तो कभी कोई फायदा मिला है और न ही मिलेगा।
योजनाएं बनती है और उसका लाभ उन्हें मिलता है, जो उस योजना के अंतर्गत ही नहीं आते। अपने गांव का उदाहरण देते हुए उसने कहा कि हाफा में अभी तक रोजगार गारंटी योजना का लाभ किसी को भी नहीं मिला। अब तीन फीसदी ब्याज में कर्ज दिए जाने की खबर अखबार में आई है। यह सब दिखावा है। सुंदर और समेलाल भी अपने इस साथी की बात पर सहमत थे।
किसानों को लाभ नहीं: सिंह
कृषक रत्न से सम्मानित किसान कमलेश सिंह की मानें तो किसानों को इस घोषणा से लाभ नहीं मिलने वाला है। सरकार को धान के समर्थन मूल्य में वृद्धि की जानी चाहिए न कि तीन फीसदी ब्याज में कर्ज की तैयारी। इससे किसान आलसी होते जा रहे हैं। उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास सरकार को करना चाहिए। वे किसी राजनीतिक पार्टी से प्रेरित होकर यह बात नहीं कर रहे हैं, बल्कि किसानों के हित की बात है।
बंट गए कर्ज और घोषणा अब
खरीफ के लिए सेवा समितियों से किसानों को 90 फीसदी कर्ज दिए जा चुके हैं और घोषणा 15 अगस्त को की गई। खरीफ की फसल के लिए 15 सितंबर तक कर्ज दिया जाता है, जबकि किसानों ने रासायनिक खाद व प्रमाणित बीजों के लिए कर्ज ले लिया है। जब तक यह योजना अमल में आएगी हो सकता है कि सौ फीसदी कर्ज बांटे जा चुके होंगे।