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..फिर पैदा न हो कोई ‘पोरा’

बिलासपुर. pora 12वीं की परीक्षा में फर्जी तरीके से अव्वल दर्जे पर पहुंची छात्रा पोराबाई के प्रकरण का खुलासा होने के बाद स्कूलों में इस बार खास सतर्कता बरती जा रही है।

तय तिथि के बाद अवैधानिक तरीके से होने वाले प्रवेश पर रोक लगाने के लिए माध्यमिक शिक्षा मंडल ने हाईस्कूलों से छात्र-छात्राओं की दर्ज संख्या संबंधी सूची मांगी है। सूची देने की अंतिम तिथि होने के कारण सोमवार को माशिमं के संभागीय कार्यालय में स्कूल प्राचार्यो की भीड़ लगी रही।

माशिमं द्वारा प्रवेश के लिए निर्धारित तिथि के बाद अब किसी भी छात्र को हाईस्कूल में प्रवेश नहीं मिल सकेगा। स्कूलों में इस तरह की गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाने के लिए माशिमं ने स्कूलों से दर्ज संख्या की सूची मांगी है। अब तक स्कूल प्रबंधन द्वारा प्रवेश संबंधी कोई जानकारी माशिमं को उपलब्ध नहीं कराई जाती थी। यही कारण है कि प्रवेश के लिए निर्धारित 31 जुलाई के बाद भी प्रवेश की प्रक्रिया जारी रहती थी।

स्थिति तो यहां तक है कि परीक्षा फार्म भराने के पहले-पहले तक भी स्कूलों में प्रवेश दिया जाता रहा। परीक्षा फार्म भराने से पहले स्कूल प्रबंधन द्वारा छात्रसंख्या बताकर परीक्षा फार्म मंगा लिया जाता था। इधर पोरा बाई मामले के बाद माशिमं ने सतर्कता बरतते हुए स्कूलों से छात्रों की दर्ज संख्या मांगी है। इसके तहत स्कूल प्राचार्यो को 9वीं से 11वीं तक के छात्रों की सूची माशिमं को देनी होगी।

सूची देने की अंतिम तिथि होने के कारण आज माशिमं के संभागीय कार्यालय में स्कूल प्राचार्यो की भीड़ लगी रही। अधिकांश स्कूलों ने दर्ज संख्या की सूची जमा कर दी है, पर कुछ स्कूलों से सूची प्रस्तुत नहीं की गई है।

अब सूची जमा करने पर 5 हजार जुर्माना
दर्ज संख्या संबंधी सूची निर्धारित तिथि तक जमा नहीं करने वालों पर कार्रवाई का निर्णय लिया गया है। माशिमं के प्रभारी संभागीय अधिकारी बीके चौधरी ने निर्धारित तिथि के बाद सूची जमा करने वालों पर 5 हजार रुपए का जुर्माना तय किया है।





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