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..तो नहीं मिलती ओलंपिक की टिकट

रोहतक. हरियाणा के तीन छोरे आज जिस मुकाम पर पहुंचे हैं, अगर तीनों खिलाड़ी सरकारी डाइट के सहारे ओलंपिक खेलने का सपना देखते तो वह कभी भी पूरा नहीं हो पाता।

जी हां, यह भी एक कड़वा सच है। आज सरकारें भले ही कितने दावे करें लेकिन महंगाई के इस जमाने में सरकारी डाइट की राशि इतनी कम है कि उसके बलबूते उन्हें कभी भी ओलंपिक की टिकट नहीं मिलती।

अखिल, बिजेंद्र व जितेंद्र बचपन से ही बाक्सिंग का कड़ा अभ्यास करते थे तो परिजनों ने घी खिलाने व दूध पिलाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। परिजन छात्रावास में जाकर घी व घी से बनी सामग्री देने जाते थे। अखिल के पिता शिव भगवान कहते हैं कि अखिल की डाइट में कभी भी कमी नहीं आने दी।

घर आने पर भी उसे भरपूर डाइट खिलाई जाती थी। वह भी इस बात को स्वीकार करते हैं कि जब तक खिलाड़ी को अच्छी डाइट नहीं मिलेगी तो वह अच्छा खिलाड़ी कभी नहीं बन सकता। शायद यह दूध व घी का कमाल है कि वह कड़ी मेहनत करता गया और ओलंपिक में पहुंच गया है वरना ओलंपिक की टिकट नहीं मिलती।

चाहिए पांच से सात हजार कैलोरी डाइट : सूत्रों के अनुसार प्रदेश सरकार द्वारा मिलने वाली डाइट स्टेट व नेशनल चैंपियनशिप में पोजिशन लेने वाले खिलाड़ियों को ही मिलती है। नर्सरी में १क्क् रुपए व विंग में खेलने वालों को करीब ६क् रुपए प्रतिदिन डाइट के मिलते हैं। वहीं, साईं लेवल पर यह करीब 200 रुपए प्रतिदिन है। मगर अखिल, बिजेंद्र व जितेंद्र कुमार जैसे बाक्सर को अंतरराष्ट्रीय मुकाम हासिल करने के लिए प्रतिदिन पांच से छह घंटे अभ्यास और करीब पांच से सात हजार कैलोरी की डाइट चाहिए।

इस डाइट में खिलाड़ी को आवश्यकतानुसार बादाम, घी, फल, जूस व दो से तीन किलो दूध नियमित रूप से लेने ही पड़ते हैं। इतनी मात्रा में डाइट मिलने के बाद ही शरीर किसी मजबूत प्रतिद्वंद्वी खिलाड़ी से भिड़ने के लायक बनता है। इस डाइट से खेलने के कारण शरीर पर पड़ने वाले सकारात्मक व नकारात्मक प्रभावों की रिकवरी भी बेहद जरूरी है। इसलिए दम तोड़ देते हैं कई अखिल : स्कूली स्पर्धाओं से लेकर राष्ट्रीय स्पर्धाओं के लिए प्रेक्टिस करने तक के सफर में न जाने कितने अखिल कुमार, जितेंद्र कुमार व बिजेंद्र हैं जो प्रतिभाशाली होते हैं, लेकिन सरकारी डाइट व परिवार की आर्थिक स्थिति उन्हें आगे नहीं बढ़ने देती।

पहले सरकार की तरफ से मिलने वाली डाइट कम थी, लेकिन मौजूदा सरकार ने खेलों को प्रोत्साहित किया है और डाइट बढ़ाई है। मगर यह भी सत्य है कि खिलाड़ी को भरपूर डाइट चाहिए, तभी वह अपने करियर को संवार सकता है।
-प्रकाश दहिया, जिला खेल अधिकारी





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