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महाराष्ट्र के गांवों को नन्ही जलपरी की सौगात

मुंबई.वह महज 15 साल की है, लेकिन उसका ख्वाब उसकी उम्र से कहीं बड़ा है। इस कच्ची उम्र में उसने ग्लोबल वर्ा्िमग के खतरों को कम करने का बीड़ा उठाया है। इस पर्यावरण प्रेमी संजना नारकर के प्रयासों का ही नतीजा है कि राजापुर (महाराष्ट्र) के निकट के सभी गांवों में आज बारहों महीने पानी उपलब्ध है। संजना अमेरिका में लॉस एंजिलिस के एक स्कूल में कक्षा नौ की छात्रा है।

अमेरिका के पूर्व उपराष्ट्रपति अल गोर की पर्यावरण पर आधारित डाक्यूमेंट्री फिल्म ‘एन इनकन्वीनिएंट ट्रुथ’ से प्रेरित होकर काम कर रही संजना ने कहा, ‘इस फिल्म ने मेरी जिंदगी और सोच बदल दी है और मैंने निर्णय किया है कि मैं जो भी कर सकती हूं, करूंगी।’

कुएं खुदवाने की ठानी

नियमित रूप से अपने पैतृक गांव आने वाली संजना ने देखा कि आसपास के गांव वाले गर्मी में कुएं सूख जाने पर मीलों दूर चलकर उसके घर वाले कुएं से पानी भरने आते हैं। तब उसने उनके लिए कुएं खुदवाने की ठानी।

एमएमबीए की ली मदद

ग्रामीणों की मदद और धन संग्रह करने के लिए संजना ने लॉस एंजिलिस स्थित संस्था महाराष्ट्र मंडल बे एरिया (एमएमबीए) की मदद से एक अलाभकारी संगठन बनाया। साथ ही www.dormindia.org नाम की वेबसाइट भी लांच की। एमएमबीए ने चंदा जमा करने में संजना की मदद की।

2600 डॉलर किए जमा

संजना ने कहा, ‘अभियान जुलाई में शुरू हुआ था और माह के अंत तक 2600 डॉलर (११३,क्७४ रु.) जमा हो गए थे। यह राशि कुआं खोदने और मोटर लगाने के लिए पर्याप्त थी। 17 अगस्त को कुएं का उद्घाटन किया गया।’ उसने कहा, ‘मैं ग्रामीण महाराष्ट्र को विकसित करना चाहती हूं।’

संजना का सूत्र वाक्य

‘मेरे महाराष्ट्र को ग्लोबल वर्ा्िमग का खतरा छू भी नहीं सकता है; कार्बन डाइऑक्साइड को ग्रहण करने के लिए ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाओ; पेड़ों को बचाने के लिए कागज, बोतलों और प्लास्टिक की री-सायकिलिंग करो तथा पर्यावरण मित्र बनो।’

‘जब संजना ने अपनी इच्छा जाहिर की तो हमने उसे प्रोत्साहित किया। समाज सेवा के प्रति उसका हमेशा से झुकाव था।’

सुनील नारकर (संजना के पिता)





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