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कमाल के गुलजार

गीतकार, संवाद लेखक, निर्माता और निर्देशक के रूप में बॉलीवुड पर गहरी छाप छोड़ने वाले गुलजार साहब ने सोमवार को अपना 72वां जन्मदिन मनाया। बच्चों, युवाओं और बुजुर्गो में समान रूप से लोकप्रिय इस ‘महारथी’ की जिंदगी के खास पहलुओं पर नजर डाल रहे हैं गायक भूपिंदर..

गुलजार की कविता

गुलजार साहब की कविता दिल पर गहरे तक असर छोड़ती हैं। 1972 में फिल्म ‘परिचय’ के निर्माण के समय गुलजार और पंचम (स्वर्गीय आरडी बर्मन) अलग अंदाज में गाने वाले फनकार को तलाश रहे थे। गुलजार साहब को गंभीर और भारी आवाज पसंद है। शायद इसी कारण मुझे फिल्म में ‘मितवा बोले’ और ‘बीती न बिताई रैना’ गाने का मौका मिला। गुलजार साहब की कविता में जिंदगी के तमाम रंग मिलते हैं।

वर्ष 1980 में मैंने उनके एलबम ‘वो जो शायर था’ में संगीत दिया था। वे इस बात से बेहद खुश थे कि एलबम के संगीत ने शायरी के मूड को बरकरार रखा है। यहां तक कि उनके हाल ही के एलबम ‘चांद परोसा है’ के बोल ‘कोसा कोसा लगता है, तेरा भरोसा लगता है, रात ने अपनी थाली में, चांद परोसा लगता है’ में खालिस गुलजार की छाप दिखाई देती है। सीधी सी बात है हमारी सोच जहां जाकर खत्म होती है, गुलजार की वहां से शरू होती है। उनके गानों में बचपन, लड़कपन और इश्क जैसी तमाम बातों की झलक है।

फिल्म ‘ओमकारा’ के गाने ‘बीड़ी जलक्ष्ले’ को ही लें, इस गीत की शुरुआती पंक्तियां आम आदमी से सरोकार रखती हैं, लेकिन अगली लाइनें एक आशिक की आशिकी की अगन को बयान करने लगती हैं। स्टेज शोज के दौरान मुझसे फिल्म ‘घरोंदा’ के गाने ‘एक अकेला इस शहर में’ की खासतौर पर फरमाइश की जाती है। विदेश में रहने वाले भारतीय इस गाने के जरिये अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हैं।

व्यक्ति के रूप में

गुलजार जी मेरे भाई की तरह हैं। उनमें ऐसा कुछ है कि आप उनका सम्मान करने के लिए खुद ही प्रेरित हो जाते हैं। वे बेहद खुशमिजाज हैं और उनकी गर्मजोशी दिल पर गहरा असर छोड़ती है। इन तमाम बातों के अलावा कविता, खगोलविज्ञान, विज्ञान अथवा भूगोल पर अपने विस्तृत ज्ञान से भी वे मुझे प्रभावित करते हैं। मेरी पत्नी मिताली और पुत्र अमनदीप उनसे बेहद घुले हैं। उन्हें बंगाली भोजन खासतौर पर हिल्सा मछली खाने का बेहद शौक है और मिताली उन्हें यह पकाकर देती हैं। कम ही लोगों को जानकारी होगी कि गुलजार नियमित रूप से टेनिस खेलते हैं।

भूपिंदर के पसंदीदा

दिल ढूंढ़ता है (मौसम)

बीती न बिताई रैना (परिचय)

नाम गुम जाएगा (किनारा)

कोई नहीं है कहीं (किनारा)

आज बिछुड़े हैं (दर्द)।





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