नई दिल्ली ब्याज दरों के बढ़ने का क्रम निकट भविष्य में थमता नहीं दिखता। मुद्रास्फीति में कमी आने के बावजूद रिजर्व बैंक सख्त मौद्रिक नीतियां जारी रख सकता है।
क्यों बढ़ेंगी दरें?
आईसीआईसीआई बैंक के एमडी व सीईओ केवी कामत ने कहा है कि ब्याज दरों के बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता कि दरें चरम पर पहुंच गई हैं या नहीं। यह देखना होगा कि मुद्रास्फीति क्या रुख अख्तियार करती है और रिजर्व बैंक क्या नीतियां अपनाती है।
कामत की बात से साफ संकेत मिलते हैं कि निकट भविष्य में ब्याज दरों में इजाफे की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। एसबीआई के चेयरमैन ओपी भट्ट ने कहा था कि ब्याज दरें चरम पर पहुंच गई हैं। बैंकों ने रिजर्व बैंक के रेपो दरों व सीआरआर में वृद्धि के बाद ब्याज दरें बढ़ाई थीं।
भट्ट का तर्क था कि क्रूड आयल की कीमतें गिर रही हैं, स्टील जैसी कमोडिटी अपने चरम पर हैं और मांग में कमी आ रही है। इसलिए मुद्रास्फीति में कमी आनी चाहिए।
क्यों सख्त रहेगा रिजर्व बैंक?
प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार समिति के चेयरमैन रहे सी रंगराजन का ख्याल है कि मुद्रास्फीति में कमी आने के बाद भी सख्त नीतियां जारी रहेंगी।
पिछले सप्ताह मुद्रास्फीति की दर 12.44 फीसदी पर पहुंच गई थीं। मुद्रास्फीति की दर अब भी 13 फीसदी तक जाने के अनुमान लगाए जा रहे हैं। रंगराजन ने कहा है कि मुद्रास्फीति को नियंत्रित रखना आसान भी नहीं है। अगर अर्थव्यवस्था 8-9 फीसदी की दर से बढ़ती है, तो 17 फीसदी की मौद्रिक आपूर्ति विकास दर रखनी होगी। रंगराजन का अनुमान है कि अगले 4-5 साल तक अर्थव्यवस्था 8-9 फीसदी की दर से बढ़ सकती है।