नई दिल्ली.कांग्रेस महासचिव के रूप में राहुल गांधी के एक साल पूरा होने पर पार्टी उन्हें बदलाव के रोल मॉडल के रूप में पेश करने वाली है। सोमवार को पार्टी मुख्यालय पर सभी महासचिवों से परिवर्तन के प्रारूप पर चर्चा की गई। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी के शीर्ष नेताओं की मौजूदगी में इन कार्यक्रमों पर मुहर लगने के बाद राहुल ने इसे पूरे जोर-शोर से अमल में लाने के लिए कहा है।
गौरतलब है कि पिछले साल सितंबर में राहुल के कमान संभालने के बाद पार्टी में करीब 50 लाख नए सदस्य शामिल हुए हैं। पार्टी नेताओं का कहना है कि राहुल की परिवर्तन लाने की कार्यशैली और उनका कार्यकर्ताओं से सीधा जुड़ाव बड़ी संख्या में युवाओं को संगठन की ओर आकर्षित कर रहा है। - उत्तराखंड, पंजाब बने प्रयोगशाला :
राहुल गांधी ने पहली कवायद संगठन में चुनाव को लेकर की है। पहली बार युवा कांग्रेस में ब्लाक से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक के अध्यक्ष सीधे चुनाव के जरिए निर्वाचित होंगे। इसके लिए उत्तराखंड और पंजाब को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चुना गया है। एनएसयूआई में चुनाव के लिए उत्तराखंड को पायलट राज्य बनाया गया है, जबकि यूथ कांग्रेस चुना