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बीजिंग ओलिंपिक की कुश्ती स्पर्धा में सुशील कुमार के कांस्य पदक जीतने पर भले ही लोगों को आश्चर्य हुआ हो, पर दिल्ली के इस पहलवान को पदक की उम्मीद थी। जीत के बाद सुशील ने कहा, ‘संभवतया आप यह कह सकते हैं कि मीडिया और अन्य लोगों को पदक की उम्मीद नहीं थी, पर मैं और मेरे कोच हमेशा से जानते थे कि यहां मेरे पदक जीतने की काफी संभावनाएं हैं। मुझे खुशी है कि मैंने इसे कर दिखाया।’ सुशील ने बताया कि वे यह पदक अपने कोच सतपाल को समर्पित करना चाहते हैं।
पहला राउंड हारने पर उदास
सुशील ने स्वीकार किया रजत पदक विजेता आंद्रे स्तादनिक से पहला राउंड हारने के बाद वे जरूर उदास हो गए थे, पर अगले ही मुकाबले में मिली जीत से उनका उत्साह बढ़ गया और वे हाथ लगे इस मौके को गंवाने के मूड में नहीं दिखे।
मुझे लगा मेरे पास मौका है
सुशील के अनुसार दो पहलवानों को हराने के बाद मुझे लगा कि मेरे पास पदक जीतने का मौका है। मैंने अपने आप से कहा कि पदक के इतने करीब पहुंच कर मैं इसे ऐसे ही जाने नहीं दूंगा। मैंने पदक के लिए जो कुछ कर सकता था किया और अंत में परिणाम मेरे पक्ष में रहा।