नई दिल्ली.भारत और पाकिस्तान में कैद एक दूसरे के नागरिकों को रिहा करवाने के प्रयासों में लगी दोनों देशों की संयुक्त न्यायिक टीम को उस समय करारा झटका लगा जब तिहाड़ जेल में बंद 69 में से 36 पाकिस्तानी कैदियों ने स्वदेश लौटने से साफ इनकार कर दिया।
पासपोर्ट जला दिए थे :
गौहरशाही पंथ से जुड़े इन कैदियों को पिछले साल भारत ने शरण देने से इनकार कर दिया था। इससे नाराज होकर इन्होंने अपने पाकिस्तानी पासपोर्ट जला दिए। तब से ये जेल में हैं। कैदियों ने टीम से कहा कि पाकिस्तान में हालात उनके अनुकूल नहीं हैं। जजों की इस समिति में पाकिस्तान के चार सदस्य हैं। एक प्रमुख सदस्य ने बताया कि उन्हें भारतीय जेलों में बंद पाकिस्तानी कैदियों को यातनाएं दिए जाने के कोई प्रमाण नहीं मिले हैं।
इस टीम ने सोमवार को अमृतसर जेल का दौरा किया था जहां 54 पाक कैदी बंद हैं। एक प्रवक्ता के मुताबिक टीम ने 12 कैदियों के रिकार्ड की सत्यापन किया ताकि उनकी स्वदेश वापसी का रास्ता खुल सके।
बच्ची व मां की रिहाई की सिफारिश :
टीम ने एक महिला कैदी तथा उसकी डेढ़ साल की बच्ची की तत्काल रिहाई की सिफारिश की। सीमा पार करते हुए जब इसे पकड़ा गया था, यह गर्भवती थी तथा जेल में ही इसने बच्ची को जन्म दिया। जजों की समिति को यह भी पता चला कि कैदियों में से 16 मानसिक संतुलन खो चुके हैं।
हमें तिहाड़ और अमृतसर जेलों के दौरे में कैदियों को किसी तरह की यातनाएं दिए जाने के संकेत नहीं मिले।’
-जस्टिस नजीर अहमद जहीद