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अब निगाहें टिकीं एनएसजी पर

वियना/बीजिंग. भारत को अपने सदस्य देशों के साथ परमाणु व्यापार करने की अनुमति देने पर विचार के लिए परमाणु आपूर्तिकर्ता देशों के समूह (एनएसजी) की दो दिवसीय बैठक गुरुवार को यहां शुरू होगी। भारत और अमेरिका के बीच होने वाले परमाणु करार को अमल में लाने के लिए एनएसजी की हरी झंडी जरूरी है।

भारतीय विदेश सचिव शिव शंकर मेनन बुधवार को एक प्रतिनिधिमंडल के साथ यहां पहुंच गए। भारत एनएसजी का सदस्य नहीं है, इसलिए वह बैठक में भाग नहीं ले सकता, लेकिन एनएसजी ने भारत को एक पर्यवेक्षक के रूप में बुलाया है।

भारतीय प्रतिनिधिमंडल का असल मकसद बैठक से पहले एनएसजी अध्यक्ष जर्मनी और दो अन्य प्रमुख सदस्य दक्षिण अफ्रीका व हंगरी के समक्ष अपना पक्ष प्रस्तुत करना है।

चीन ने नहीं खोले पत्ते : एनएसजी की बैठक में चीन भारत का समर्थन करेगा या नहीं इस बारे में उसने अब तक स्थिति स्पष्ट नहीं की है। बुधवार को बीजिंग में चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता किन गैंग ने केवल इतना कहा कि परमाणु अप्रसार की अखंडता और प्रभाव कायम रखा जाना चाहिए, लेकिन इसके साथ ही सभी देशों को परमाणु ऊर्जा का शांतिपूर्ण उपयोग करने का अधिकार भी है।

आस्ट्रिया विरोध में : आस्ट्रिया भारत को छूट देने का सख्त विरोध कर रहा है और वह इस संबंध में अमेरिकी विचारों से भी सहमत नहीं है। उसका मानना है कि इससे परमाणु अप्रसार संधि कमजोर होगी।

‘इस बैठक में फैसले की संभावना नहीं’
वाशिंगटन. भारत के साथ परमाणु करार का विरोध कर रहे अमेरिका के एक विचार समूह (थिंक टैंक) का कहना है कि एनएसजी की बैठक में भारत को छूट दिए जाने के प्रस्ताव पर फैसला होने की उम्मीद नहीं है, क्योंकि समूह के कई देशों को अब भी कुछ मुद्दों पर आपत्ति है।

आर्म्स कंट्रोल एसोसिएशन नामक इस विचार समूह के कार्यकारी निदेशक डैरिल किम्बैल ने वाशिंगटन में दावा किया कि प्रस्ताव में कुछ बदलाव करना ही पड़ेगा। इसे देखते हुए समूह अपना निर्णय सितंबर तक के लिए टाल सकता है।

आज मेघालय पहुंचेंगे काकोडकर
मेघालय में यूरेनियम खनन परियोजना का विरोध कर रहे स्थानीय समूहों से बातचीत करने के लिए परमाणु ऊर्जा विभाग के चेअरमैन अनिल काकोडकर गुरुवार को शिलांग पहुंच रहे हैं। भारत में यूरेनियम की मांग और करार के परिप्रेक्ष्य में यह यात्रा अहम है।

बताया जाता है कि केंद्र सरकार खनन शुरू करवाने के लिए उत्सुक है। एईडी के सर्वे के मुताबिक, मेघालय में 3.75 लाख टन यूरेनियम अयस्क का भंडार है और इससे देश की 16 प्रतिशत मांग पूरी हो सकती है। डेढ़ दशक से अटकी पड़ी इस परियोजना का विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि इससे निकलने वाला विकिरण स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है।





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