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जहां तेरी ये नजर है, मेरी..

भोपाल. जंग और राजनीतिक जंग में सब जायज है। चुनावी बिसात पर पांच साल से टिके मोहरों को पटकनी देने के प्रयास तेज हो गए हैं। और यह विरोधी खेमा नहीं, नेपथ्य से अपने ही कर रहे हैं।

शह और मात के इस खेल में जासूसों की मदद ली जा रही है। यह इसलिए हो रहा है कि जब टिकट मांगने कोई आलाकमान के पास जाए तो उसके पत्ते खोले जा सकें। दोनों ही प्रमुख पार्टियों कांग्रेस और भाजपा में अपने ही लोगों को निपटाने के लिए जासूसों को जिम्मेदारी सौंप दी गई है।

राजधानी की डिटेक्टिव एजेंसियों के पास इन दिनों भारी काम है। उनके पास चोरी, अपहरण जैसे मामलों के नहीं बल्कि नेताओं की जासूसी करवाने के सौदे आ रहे हैं। जासूसी विरोधी पार्टियां नहीं बल्कि एक ही पार्टी के विरोधी धड़े करवा रहे हैं। डीबी स्टार ने शहर की तीन डिटेक्टिव एजेंसियों से बात की।

क्लाइंट के बिदक जाने की आशंका जाहिर करते हुए उन्होंने नाप नहीं छापने का अनुरोध किया और बताया कि पहले तो विरोधी पार्टियां एक-दूसरे की जासूसी करवाती थीं, लेकिन इस चुनाव में अपनी ही पार्टी के नेता के खिलाफ सबूत जुटाने में हमारी मदद ली जा रही है। इसमें मुख्यत: भोपाल, चंबल, धार के नेता निशाने पर हैं।

वैसे जासूसी तो दोनों ही दलों में करवाई जा रही है लेकिन सत्तासीन भाजपा ज्यादा मामलों में सरकार के ही खुफिया विभाग की मदद ले रही है। जबकि कांग्रेसी अपने विरोधी को चित करने के लिए बड़े पैमाने पर निजी जासूसों का सहारा ले रहे हैं।

अपना नेटवर्क बनाया: इस काम को अंजाम देने के लिए जासूसों ने भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, सहित अन्य जिलों में भी अपना जाल फैला दिया है। सरकारी खुफिया विभाग के कुछ लोगों के साथ-साथ इसमें पार्टी के उन छुटभैये नेताओं की मदद ली जा रही है जिनके पास रोजगार का कोई खास जरिया नहीं है।

इन नेताओं पर है निशाना

विरोध खुले तौर पर
धार : कांग्रेस में नेता प्रतिपक्ष जमुना देवी पर सबकी निगाहें हैं। जासूसों की सूची में वे हिटलिस्ट पर हैं। पार्टी के ही लोगों का मानना है कि वे निश्चित रूप से कुक्षी से टिकट मांगेगी। यदि पार्टी जीतती है तो सोनिया गांधी से उनकी नजदीकी के कारण वे किसी बड़े पद की दावेदारी कर सकती हैं। इसका खुलासा इसी बात से होता है कि कुछ दिनों पहले धार के दौरे पर आए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुरेश पचौरी से जमुना देवी ने कहा था कि वे गौतम के कार्यक्रम में न जाए।

पचौरी ने उस समय तो उनकी बात मान ली लेकिन बाद में वे सर्मथकों से मिलने गए। उधर, धार जिला कांग्रेस के उपाध्यक्ष बालमुकुंद गौतम भी उनके विरोध में खुले तौर पर सामने आ गए हैं। कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति में मोहनसिंह बुंदेला को जमुनादेवी और गौतम दोनों का ही घोर विरोधी माना जाता है। वे खुद धार से कांग्रेस के दावेदार हैं।

सूत्रों के मुताबिक तीनों ही एक दूसरे के निशाने पर हैं। उधर, धार में बीजेपी का एक धड़ा राज्य मंत्री रंजना बघेल, पूर्व मंत्री जगदीश मुवेल, धार के विधायक जसवंत सिंह राठौर और सरदारपुर के विधायक के खिलाफ कमीशनखोरी, तबादलों-नियुक्तियों में भ्रष्टाचार, अपने पसंदीदा लोगों को पदस्थापना दिलवाने के मामलों में जानकारी निकाल रहे हैं। मनावर क्षेत्र के लोगों ने तो पार्टी के नेताओं के सामने मय सबूत के अपनी बहुत सी बात रख भी दी है।

दिग्गज हैं मौन, समर्थकों में जमकर गहमागहमी

एक-दूसरे पर नजर
भोपाल : राजनीतिक गलियारों में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुरेश पचौरी के दो समर्थक सूनील सूद और अतुल शर्मा को टिकट मिलना तय माना जा रहा है। इसके चलते पार्टी का विरोधी खेमा सक्रिय हो गया गया है और उनका टिकट कटवाने की हर संभव कोशिश की जा रही है।

पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और राहुल सिंह खेमे से ताल्लुक रखने वाले विभा पटेल, पी.सी. शर्मा, आरिफ मसूद, महेद्र सिंह चौहान, साजिद अली, जेपी धनोपिया भी टिकट के लिए अपनी दावेदारी रखेंगे। इनके विरोधी इन पर नजर गढ़ाए हैं।

जबर्दस्त रस्साकशी
ग्वालियर : दिग्विजय सिंह से जुड़े लोग डॉ. गोविंद सिंह, केपी सिंह, भगवान सिंह यादव हैं। वहीं पचौरी समर्थक पूर्व मंत्री राकेश चौधरी और विधायक सत्यदेव कटारे हैं। इनके बीच टिकट को लेकर काफी रस्साकशी है।

तगड़ी राशि खर्च
इंदौर : पचौरी समर्थक शोभा ओझा और राहुल सिंह समर्थक पंकज संघवी दोनों ही विस पांच से दावेदार हैं। इनमें अंतरविरोध खुलकर सामने आ गया है। वहीं कांग्रेस का एक धड़ा अश्विन जोशी के खिलाफ सबूत जुटा रहा है।

पहले भी होती रही है अलग तरह की जासूसी
सालों पहले पंडित द्वारका प्रसाद मिश्र जब अपने मंत्रिमंडल का गठन करते थे तो वे उन्हीं विधायकों को मंत्रिमंडल में शामिल करते थे जिनके बारे में खुफिया पुलिस क्लीन चिट दे देती थी। पूर्व मुख्यमंत्री अजरुन सिंह भी कई मौकों पर अपने मंत्रियों पर अंकुश रखने के लिए खुफिया रिपोर्ट मंगवाते थे।





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