भोपाल.
अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट के मास्टर माइंड अबू बशीर को ट्रेनिंग देने वाले सफदर नागौरी की साढ़े चार महीने पहले मप्र पुलिस द्वारा गिरफ्तारी और उससे पूछताछ पर अब सवाल उठने लगे हैं। आखिर नागौरी से पूछताछ में कहां चूक हुई जिसकी वजह से मप्र या अन्य राज्य की पुलिस अबू बशीर को उस समय गिरफ्तार नहीं कर पाई।
मप्र पुलिस ने सफदर नागौरी और सिमी के 13 अन्य प्रमुख सदस्यों को 26-27 मार्च 08 की रात गिरफ्तार किया था। इसके बाद इनसे इंटेलीजेंस ब्यूरो, राज्य पुलिस की एसटीएफ, मुंबई की एटीएस, नागपुर, उप्र, गुजरात, राजस्थान, हरियाणा, केरल, कर्नाटक, दिल्ली और सीबीआई की टीमों ने कई दिनों तक पूछताछ की थी।
दो राज्यों ने करीब एक-एक सप्ताह तक मप्र में रुककर इनसे पूछताछ की थी, जबकि अन्य राज्यों की पुलिस ने भी इनकी खबर ली थी। यही नहीं पुलिस ने सफदर नागौरी, कमरुद्दीन नागौरी और आमिल परवेज का नारको टेस्ट भी कराया था, लेकिन इसके बाद भी अबू बशीर और उसकी कार्ययोजना के बारे में सुराग तक नहीं लग सका।
कयास लगाए जा रहे हैं कि पूछताछ के बाद बशीर की गिरफ्तारी हो जाती तो शायद अहमदाबाद के सीरियल ब्लास्ट की घटना नहीं होती। रिटायर्ड आईपीएस अधिकारियों ने भी नागौरी से पूछताछ में कुछ कमी रह जाने की बात कही है, मगर यह भी कहा है कि तात्कालिक परिस्थितियों के हिसाब से पुलिस ने बेहतर निर्णय लिया होगा।
सफदर नागौरी और सिमी के अन्य प्रमुख सदस्यों की जब गिरफ्तारी हुई थी तब पुलिस ने तात्कालिक परिस्थितियों के अनुसार बेहतर कार्रवाई की होगी। मगर पूछताछ में पुलिस शायद उनकी पिछली गतिविधियों तक सीमित रही और भविष्य के प्लान के बारे में नहीं पूछा गया।
- सुभाषचंद्र त्रिपाठी, पूर्व पुलिस महानिदेशक
अगर नागौरी, अबू बशीर से मेल-मुलाकात वाला था तो उस तक पहुंचा जा सकता था। जब उसने अबू बशीर को ट्रेनिंग दी तो वे दोनों आपस में मिले तो होंगे।
- अरुण गुटरू, रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी
सफदर नागौरी हो या अन्य दूसरे अपराधी, पुलिस के सामने वे बहुत कुछ बोल जाते हैं। सिमी नेताओं के खिलाफ मप्र पुलिस की कार्रवाई अच्छी थी। पुलिस को उस समय सूचना मिली थी इसलिए उसकी तह तक जाना था।
- केएस ढिल्लन, रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी