जयपुर. शहर की एक सराय में आतंकवादियों के ठहरने की खबरों के बीच भास्कर प्रतिनिधि ने बुधवार को मोतीडूंगरी रोड स्थित मुस्लिम मुसाफिरखाने के रजिस्टरों की जांच की, जिनमें आतंकवादियों के नाम (जो मीडिया में प्रचलित हैं) नहीं मिले। हालांकि पुलिस व जांच टीमों का मानना है कि आतंकवादी यहां नाम व पहचान बदलकर ठहरे।
मुसाफिरखाने के संचालकों और आसपास के निवासी भी इस आशंका को गलत नहीं ठहराते। फिर भी मुसाफिरखाने का एक पहलू और सामने आया और वह है इसकी बदनामी।
मुसाफिरखाने के सचिव शौकत कुरैशी की पीड़ा है कि पिछले कुछ दिनों से मुसाफिरखाना बदनाम हो गया है, जिसकी वजह से लोग यहां आने से कतराने लगे हैं। मुसाफिरखाना में बम धमाकों के आरोपी आतंकी ठहरने की मीडिया में प्रचारित खबरों का असर ही है कि हमेशा मुसाफिरों की चहल पहल से गुलजार रहने वाला मुस्लिम मुसाफिरखाना इन दिनों सन्नाटे में डूबा है। आज यहां 25 कमरे खाली पड़े हैं।
कुरैशी ने बताया कि मुसाफिरखाना से एसओजी व पुलिस दो बार रजिस्टर लेकर गई थी। जांच के बाद वापस दे दिए, लेकिन एक बार भी पदाधिकारियों को यह नहीं बताया कि वहां कोई आतंकी व उसके साथी रुके थे।
बार-बार जांच, नहीं थे आतंकी
कुरैशी के अनुसार जयपुर में बम धमाकों के दिन व उसके बाद स्थानीय पुलिस कई दिन रोजाना आई और रजिस्टर व कमरे चैक किए। एसओजी वाले 20 से 22 मई के बीच रजिस्टर ले गएथे और दूसरे दिन रजिस्टर लौटाकर एक व्यक्ति द्वारा गुजराती में किए हस्ताक्षरों के बारे में पूछा था। 8 अगस्त को एसपी कार्यालय से पुलिस वाले आए थे और मार्च से अब तक के चार रजिस्टर लेकर गए थे। उन्होंने जांच के बाद उसी दिन शाम को चारों रजिस्टर लौटा दिए।
स्थानीय पुलिस, एसओजी व एसपी कार्यालय ने कभी यह नहीं बताया कि यहां कोई आतंकी व अन्य अपराधी रुके थे। कुरैशी ने रजिस्टर सामने रखकर मई माह में मुसाफिरखाने में रुके प्रत्येक व्यक्ति का नाम व पता बताया, जिनमें गुजरात में गिरफ्तार साजिद मंसूरी व वांछित आतंकियों के नाम नहीं थे।
कुरैशी के मुताबिक मुसाफिरखाने में ठहरने वाले व्यक्तियों से आईडी कार्ड की प्रति ली जाती है। कमरा लेते व खाली करते समय मुसाफिर के दस्तखत कराए जाते हैं। मुसाफिर के टूर की जानकारी के साथ उसका पता व मोबाइल या फोन नंबर भी लिखे जाते हैं।
कोई जानकारी नहीं
नाहरी का नाका स्थित जिस उपासना स्थल में बम धमाकों का मास्टर माइंड अबू बशर व उसका साथी मौलवी मार्च में रुका था, वहां पूछताछ करने पर लोगों ने जानकारी नहीं होने की बात करते हुए नाराजगी प्रकट की।
नाम बदलने में मंसूरी माहिर
जयपुर व अहमदाबाद में बम धमाके करवाने वाला साजिद मंसूरी अब तक चार बार अपने नाम बदल चुका है।
तौफीक 13 मई को जयपुर में था
13 मई को इंजीनियर तौफीक जयपुर में था। वह साजिद मंसूरी के साथ यहां से उसी दिन चला गया था। विशेष जांच दल (एसआईटी) व गुजरात पुलिस की जांच में सामने आया है कि साजिद मंसूरी व तौफीक अलग-अलग मार्गों से जयपुर आए और बम ब्लास्ट के बाद साथ-साथ निकले थे।
तौफीक व साजिद की देखरेख में जयपुर में बम रखे गए थे। यहां आने के बाद साजिद व तौफीक ने राजस्थान में पहले खरीदी सिम का उपयोग किया था। एसआईटी के अनुसार, अभी जांच-पड़ताल साजिद के परिचितों तक ही सीमित है। जब तक साजिद जयपुर नहीं लाया जाता, तब तक पूरी तस्वीर साफ नहीं हो सकती।