जयपुर. राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (नरेगा) में राज्य सरकार के पास इस साल एक अगस्त को 555.78 करोड़ रुपए बाकी थे, फिर भी सरकार कई जिलों में श्रमिकों के भुगतान का संकट होने की बात कह रही है।
राज्य सरकार इस संकट के लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार बता रही है। कुछ जिलों में इस साल उपलब्ध राशि का दुगना तक खर्च हो चुका है, जबकि कई जिले ऐसे हैं जहां करीब 30 फीसदी राशि ही खर्च हुई है।
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के अनुसार इस योजना के तहत 4 जून से 31 जुलाई तक राज्य के 21 जिलों के लिए 1427 करोड़ 46 लाख 95 हजार रुपए की मांग केंद्र सरकार से की गई थी। इसके एवज में इन दो महीनों में केंद्र ने राज्य सरकार को 598 करोड़ 41 लाख 11 हजार रुपए दिए।
दूसरी ओर, विभाग की रिपोर्ट के अनुसार योजना के तहत राज्य सरकार के पास इस साल 1 अप्रैल को 18.01 करोड़ रुपए मायनस में थे। इस साल जुलाई तक सभी जिलों के लिए केंद्र से इस योजना में 2829 करोड़ 47 लाख रुपए मिले।
इस तरह जुलाई 08 को योजना के फंड में कुल उपलब्धता 2811 करोड़ 46 लाख रुपए रही। इसमें से जुलाई तक कुल 2255 करोड़ 68 लाख रुपए खर्च हुए। इस तरह 555.78 करोड़ रुपए एक अगस्त को इस योजना में बचे हुए थे।
पांच जिलों के लिए एक पैसा नहीं मिला
राज्य के 5 जिलों जैसलमेर, अजमेर, जोधपुर, करौली एवं नागौर के लिए नरेगा योजना के तहत दो महीने में एक पैसा भी केंद्र सरकार से नहीं मिला है। राज्य सरकार ने जैसलमेर जिले के लिए 75 करोड़ 79 लाख, अजमेर के लिए 118 करोड़ 44 लाख, जोधपुर के लिए 25 करोड़ 18 लाख, करौली के लिए 29 करोड़ 8 लाख एवं नागौर जिले के लिए 88 करोड़ 49 लाख रुपए देने की मांग की थी।
4 जिलों को मिला पूरा पैसा
दो महीने में सवाई माधोपुर जिले को पूरी राशि 48.58 करोड़, उदयपुर जिले को 85.83 करोड़ की मांग पर 80 करोड़, भीलवाड़ा जिले को पूरी राशि 33.64 करोड़ एवं जयपुर जिले को 50.41 करोड़ की मांग पर 50 करोड़ रुपए मिले।
केंद्र सरकार ने दूसरी किस्त की भी पूरी राशि अभी नहीं दी है। समय पर राशि नहीं मिलने से श्रमिकों के भुगतान का संकट हो रहा है। केंद्र सरकार को इस संबंध में पत्र लिखा गया है।
—कालूलाल गुर्जर, ग्रामीण विकास, एवं पंचायती राज मंत्री