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Madhya Pradesh
Gwalior Gwalior ग्वालियर. लाइसेंसी शस्त्रों की अंचल में बढ़ती संख्या ने भारत निर्वाचन आयोग को चिन्ता में डाल दिया है। चिंता इसलिए है कि शस्त्रों के कारण चुनाव की निष्पक्ष प्रक्रिया में व्यवधान आ सकता है। इसी कारण फिलहाल चुनाव पूर्ण होने तक जिले में लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया पर रोक लगा दी गई है।
कलेक्टर आकाश त्रिपाठी ने इस मामले में सभी अधीनस्थ अधिकारियों को निर्देश भी जारी कर दिए हैं। उल्लेखनीय है कि चुनाव संबंधी तैयारियों को लेकर मंगलवार को सिटी सेंटर में हुई आला अधिकारियों की बैठक में उपायुक्त भारत निर्वाचन आयोग आर बालाकृष्णन ने लाइसेंसी शस्त्रों की बढ़ती संख्या पर चिन्ता व्यक्त की थी।
कलेक्टर आकाश त्रिपाठी ने बुधवार को दफ्तर पहुंचते ही उनसे मिलने पहुंची भीड़ के बीच स्टाफ से यह मुनादी करवा दी कि अब लाइसेंस संबंधी आवेदनों पर चुनाव कार्य पूर्ण होने तक विचार नहीं किया जाएगा। इस आशय की सूचना भी कलेक्ट्रेट परिसर में जगह-जगह चस्पा करवा दी गईं।
श्री त्रिपाठी ने दोपहर में एडीएम आरके जैन के साथ शस्त्र लाइसेंस प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा कर अगली रणनीति बनाई और इस प्रक्रिया से जुड़े सभी अधिकारियों से कहा कि वे अब लाइसेंस प्रक्रिया से संबंधित सभी काम बंद कर दें।
आदेश का असर
लाइसेंस प्रक्रिया पर रोक का असर आम जनता के अलावा विभिन्न राजनीतिक दलों पर भी होगा। बुधवार को रोक लगने के तुरन्त बाद गोरखी में एक वर्तमान तथा एक पूर्व विधायक अपने समर्थकों के साथ कलेक्टर व एडीएम से मिलने पहुंचे। इनमें से एक ने कलेक्टर से यह आग्रह भी किया कि वे लाइसेंस प्रक्रिया जारी रखने का कोई रास्ता निकालें। फिलहाल कलेक्टर ने विधायक को आयोग से बात करने को कहा है।
लाइसेंस प्रक्रिया पर तुरन्त रोक लगने से जिले के लगभग सात हजार आवेदकों को निराश होना पड़ेगा। इनमें से छह हजार आवेदन पुलिस अधीक्षक के पास भेजे जा चुके हैं जबकि एक हजार जिला कार्यालय में ही अलग-अलग दफ्तरों में लंबित हैं।
क्या है वर्तमान स्थिति
लाइसेंस देने की वर्तमान प्रक्रिया खाद्य विभाग की फ्री सेल केरोसिन व्यवस्था की तरह है। कोई भी व्यक्ति कभी भी आवेदन कर सकता है। इस आसान व्यवस्था के कारण ही लाइसेंसों की संख्या जिले में लगातार बढ़ती जा रही है जो अब 25 हजार को पार कर गई है।
एडीएम कार्यालय के अनुसार पूर्व में पांच हजार की आबादी पर एक शस्त्र लाइसेंस देने का नियम था पर अब ग्वालियर-चम्बल संभाग के सभी जिलों को इससे मुक्त कर दिया गया है। बात यदि वर्ष 2008 को लेकर करें तो कुल 19 सौ लाइसेंस जारी हो चुके हैं, इनमें से 130 पिछले दो माह में जारी किए गए हैं।
क्या हुआ बैठक में
मतदाता सूची के काम में अंचल के कुछ जिलों की प्रगति संतोषजनक नहीं मिलने पर भारत निर्वाचन आयोग के उपायुक्त आर बालाकृष्णन असंतुष्ट थे। उनके पास फीड बैक यह था कि कलेक्टर केवल लाइसेंस देने के काम में व्यस्त रहते हैं, इसलिए मतदाता सूची के त्रुिटरहित होने में समय लग रहा है। बस यहीं से लाइसेंसों की संख्या पर चर्चा हुई और श्री बालाकृष्णन सख्त हो गए। उन्होंने कहा कि यदि सूची में गड़बड़ मिली तो वे किसी भी अधिकारी को बख्शेंगे नहीं। उन्होंने अंचल के सभी जिलों से जारी लाइसेंसों की जानकारी भी मांगी।
ग्वालियर-चम्बल संभाग में लाइसेंसी शस्त्र के शौकीन बहुत हैं। इसी कारण आवेदन अधिक आते हैं। यह बात भारत निर्वाचन आयोग के उपायुक्त को बता दी गई है। आयोग से मिले निर्देश पर ही फिलहाल लाइसेंस प्रक्रिया बंद कर दी गई है। किस माह कितने लाइसेंस जारी किए गए, इसकी सूची तैयार की जा रही है। अब चुनाव होने तक सभी राजस्व अधिकारी चुनाव संबंधी काम को प्राथमिकता देंगे।
-आकाश त्रिपाठी, कलेक्टर