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Chhattisgarh
Bilaspur Bilaspur बिलासपुर. हाईकोर्ट ने सूचना आयोग के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें आयोग ने विद्युत मंडल को सूचना के अधिकार के तहत जानकारी देने को कहा था।
विद्युत मंडल ने आयोग की वैधता और उसके आदेश देने के अधिकार पर सवाल उठाते हुए याचिका दायर की थी। चीफ जस्टिस राजीव गुप्ता व जस्टिस सुनील सिन्हा की डिविजन बेंच ने बुधवार को मंडल के पक्ष में स्थगन दे दिया।
रायपुर निवासी मोहन एंटी ने छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत मंडल के समक्ष सूचना के अधिकार के तहत आवेदन कर कुछ जानकारी चाही थी। विद्युत मंडल ने जानकारी नहीं दी और आवेदन को भी खारिज कर दिया। श्री एंटी ने विद्युत मंडल के अपीलीय अधिकारी के समक्ष प्रथम अपील की। सुनवाई के बाद वहां भी अपील खारिज कर दी गई। इसके बाद आवेदक ने छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग के समक्ष सूचना के अधिकार की धारा-19 के तहत आवेदन दिया।
आवेदन का निराकरण करते हुए राज्य सूचना आयोग ने 7 नवंबर 2007 को एक आदेश जारी किया। इसमें विद्युत मंडल को कहा गया था कि वह आवेदक को चाही गई जानकारी उपलब्ध कराए। सूचना आयोग के इस आदेश को चुनौती देते हुए विद्युत मंडल के जन सूचना अधिकारी ने वकील सुनील ओटवानी, सलीम काजी के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी।
याचिका में कहा गया था कि सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 15 (2) के अनुसार किसी भी राज्य के सूचना आयोग में एक मुख्य सूचना आयुक्त का पद होगा। उनके अधीन कम से कम एक व अधिकतम 10 सूचना आयुक्त होंगे, जो प्रकरण की सुनवाई के बाद आदेश पारित करेंगे। छत्तीसगढ़ के राज्य सूचना आयोग में सिर्फ एक सूचना आयुक्त ही पदस्थ है। इसलिए उसके द्वारा जारी किया गया आदेश प्रभावी और लागू करने योग्य नहीं माना जाएगा।
इस कारण आयोग के आदेश का पालन करने के लिए छत्तीसगढ़ विद्युत मंडल को बाध्य नहीं किया जा सकता। पिछली सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट की एकल पीठ ने नीतिगत मामला होने के कारण प्रकरण डिविजन बेंच में स्थानांतरित कर दिया था। डीबी ने आज सुनवाई के बाद याचिकाकर्ता के तर्को से सहमत होकर आयोग के आदेश पर रोक लगा दी है।