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Chhattisgarh
Bilaspur Bilaspur बिलासपुर.
वर्षा ऋतु के बुढ़ापे के बारे में ‘रामचरितमानस’ में गोस्वामी तुलसीदास ने किष्किन्धाकांड में एक चौपाई लिखी थी ‘ बरषा विगत सरद रितु आई, लक्षिमन देखहु परम सुहाई। फूलें कास सकल महि छाई, जनु बरषा, कृत प्रगट बुढ़ाई।’
इसके माध्यम से उन्होंने बताया था कि कास के फूल खिल गए हैं और वर्षा ऋतु का बुढ़ापा आ गया है। वर्तमान में भी जंगल व गांवों में कास के फूल खिल गए हैं और शहर में बिकने के लिए पहुंच गए हैं।
खमरछट में इसका उपयोग पूजा के दौरान किया जाएगा। सहायक मौसम वैज्ञानिक जेके इंगले ने भी बारिश के बुढ़ापे की पुष्टि की है। उनका कहना है कि जिले में अधिकांश बारिश हो चुकी है, जबकि अगस्त के बाद बारिश कम होती जाएगी। बूढ़े होते बारिश के बीच अब भी जिले के खेत प्यासे हैं। 20 हजार हेक्टेयर खेत में रोपाई तो 60 हजार हेक्टेयर में बियासी नहीं हुई है।
इस बार जिले के कई इलाकों में खंड वर्षा हुई है, इससे वे इलाके असिंचित ही रह गए हैं। खासतौर पर मरवाही, मुंगेली, लोरमी, तखतपुर व पथरिया तहसील के किसान कम बारिश होने से ज्यादा प्रभावित हैं। किसान रोज ही आसमान की ओर इस उम्मीद से निहारते हैं कि आज बारिश होगी।
कई बार आसमान पर काले बादल छाते हैं लेकिन बगैर बरसे ही बादल किसानों को धोखा देकर लौट जाते हैं और उनकी उम्मीद धरी की धरी रह जाती है।एक जून से अब तक जिले में हालांकि 690 मिमी औसत बारिश हो चुकी है, लेकिन पांच-छह तहसीलों में सामान्य (600 मिमी) से कम बारिश होने से खेती-किसानी पिछड़ रही है।
बोनी के बाद रोपाई व बियासी भी कम बारिश की चपेट में है। उल्लेखनीय है कि जिले में इस बार खरीफ के अंतर्गत 2 लाख 83 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि में धान की खेती किसानों द्वारा की जा रही है। चार जून से प्री मानसून बारिश की शुरुआत हुई और किसानों ने खेतों की जुताई शुरू कर दी।
12 जून को मानसून जिले में पहुंचा और अच्छी बारिश हुई। इसे देखते हुए किसान तेजी से खेती-किसानी में जुट गए लेकिन इसके बाद मौसम ने किसानों से छल करना शुरू कर दिया। समय पर पर्याप्त बारिश नहीं होने से बोनी पिछड़ गई।
मौसम की बेरुखी
मौसम की बेरुखी अभी तक बरकरार है। किसान कम बारिश की मार झेल रहे हैं। रोपाई के लिए ज्यादा पानी की आवश्यकता किसानों को होती है, लेकिन कम बारिश होने से रोपाई कार्य में बाधा आ रही। जानकारों के मुताबिक तो अब रोपाई हो जानी थी, लेकिन अभी तक जिले में 15 फीसदी रोपाई नहीं हुई है। 20 हजार हेक्टेयर खेतों में रोपाई करने के लिए तैयार की गई धान की नर्सरी को अच्छी बारिश का इंतजार है। इधर बियासी का हाल भी बुरा है। 30 प्रतिशत खेतों में अच्छी बारिश नहीं होने से बियासी नहीं हो पा रही है।
रबी के लिए बांध से पानी मिलने में संदेह
कलेक्टर सुबोध सिंह ने पहले 70 फीसदी पानी बांध में रखने के निर्देश दिए थे, लेकिन किसानों की समस्या को देखते हुए उन्होंने बांधों के गेट खोलने के निर्देश दिए। वर्तमान में खूंटाघाट, घोंघा व खुड़िया बांध से पानी दिया जा रहा है, लेकिन इससे किसानों की समस्या कुछ हद तक ही दूर हुई है। जिन किसानों के खेत ऊंचे स्थानों पर हैं, उन्हें नहरों से पानी नहीं मिल पा रहा हैं। बांध वाले इलाकों में अच्छी बारिश नहीं होने से पहले ही जलाशय में पानी कम है।
अधिकारियों का कहना है अगर अब खरीफ के लिए पानी देना बंद नहीं किया गया, तो रबी फसलों की सिंचाई के लिए बांधों में पानी ही नहीं बचेगा। इसे लेकर जिला प्रशासन व जल संसाधन विभाग के अधिकारी पशोपेश में हैं।
अभी तक जिले के कुछ इलाकों में अच्छी बारिश नहीं हुई, जिसके कारण किसान रोपा व बियासी में पिछड़ गए हैं। बांधों का पानी भी पर्याप्त नहीं है। अच्छी बारिश होने पर ही किसानों को राहत मिल सकती है।
—आरके कश्यप, उप संचालक, कृषि विभाग