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बॉलीवुड में छाया अजमेर का किंग

अजमेर. puri हाल ही में रिलीज हुई फिल्म ‘सिंह इस किंग’ को सुपर हिट बनाने में ‘अजमेर के किंग’ ने भी खास योगदान दिया है। शहर में जन्मे इस शख्स ने छोटी सी उम्र में बॉलीवुड की एक दर्जन से ज्यादा फिल्मों की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

बात चाहे एक्टिंग की हो, या डायलॉग्स की, फिल्मों के गीत लेखन की या स्टोरी राइटिंग की मयूर पुरी आज बॉलीवुड में एक जाना पहचाना नाम है। यही वजह है कि महज 34 साल की उम्र में उसे बॉलीवड के दिग्गज फिल्म मेकर यश चौपड़ा ने अपनी कई फिल्मों में मौका दिया।

जौंसगंज निवासी और रेलवे से रिटायर्ड सीटीआई अरुण पुरी के पुत्र मयूर पुरी का जन्म 28 मई 1974 को रेलवे अस्पताल में हुआ। पिता कला संगम तो चाचा हर्ष पुरी क्लब अजयमेरू, सप्तक, जैसी कई संस्थाओं से जुड़े हैं।

मयूर के बाल मन पर यहीं से गीत- संगीत और नाटकों का प्रभाव पड़ा। उसके चाचा ने अतीत की यादों को कुरेदते हुए बताया कि मयूर को शुरू से ही कुछ करने का जुनून था। उसे माउंटेनियरिंग का भी शौक था। एक बार पुष्कर घाटी में जब गाड़ी पंक्चर हो गई तो वह पहाड़ी पर चढ़ गया और थोड़ी देर बाद जब नीचे आया तो एक गीत तैयार था। शायद उसके लेखन का दौर यहीं से शुरू हुआ।

संघर्ष से सफलता तक का दौर
मयूर ने बताया कि अजमेर में करीब 20 साल रहने के बाद उसके पिता अहमदाबाद में बस गए। उसने गांधीनगर से बीए करने के बाद उसने साइक्लोजी और होटल इंटीरियर डेकोरेशन का कोर्स भी किया। इसके बाद उसने ‘लाइट हाउस’ एड कंपनी खोली। कंपनियों के एड बनाने के सिलसिले में जब मुंबई आना-जाना शुरू हुआ तो इस दौरान फिल्म ‘मेरे यार की शादी’ में संवाद लेखन का काम मिला।

इसके बाद जब महान फिल्मकार यश चौपड़ा से मुलाकात हुई तो उन्होंने ‘मेरे यार की शादी है’, ‘धूम’ जैसी कई फिल्मों में मौका दिया। उन्होंने बताया कि ‘सिंह इज किंग’ के गीत सुपरहिट होने के बाद मुझे कई नामी-गिरामी प्रोडक्शन से ऑफर मिल रहे हैं। मयूर की जल्द ही 7 और फिल्में रिलीज होने वाली हैं। इनमें उन्होंने गीतकार, सहायक निर्देशक और संवाद लेखन का काम किया है।

जल्द आएंगे पुष्कर
सिंह इज किंग की सफलता से उत्साहित मयूर ने इसका श्रेय अपने परिवार और ईश्वर को दिया। उन्होंने बताया कि वह जल्द ही ब्रrाजी के मंदिर के दर्शन और पुष्कर सरोवर की पूजा-अर्चना के लिए अजमेर आएंगे।

फिल्मी कॅरिअर एक नजर

असिस्टेंट डायरेक्टर
धूम
डायलॉग्स
ओम शांति ओम, मेरे यार की शादी है
लिरिक्स
सिंह इज किंग, स्पीड, ढोल, हैट्रिक, अपना सपना मनी-मनी, गैंगस्टर, फाइट क्लब, एक खिलाड़ी-एक हसीना, गरम मसाला, चॉकलेट, स्क्रीन प्ले राइटरमेरे यार की शादी है
स्टोरी राइटर
माइ नेम इज एंथोनी गोजाल्वेज

लोहड़ी पर अजमेर में
मयूर के चाचा हर्ष पुरी ने बताया कि बालीवुड में बिजी होने के कारण अब भले ही उसे कम समय मिलता हो लेकिन वह साल में कम से कम एक बार अभी भी घर जरूर आता है। उसकी कोशिश रहती है कि हर साल लोहड़ी अजमेर में ही मनाए। इधर मयूर का कहना था कि लोहड़ी बचपन की पुरानी यादें ताजा करने का जरिया है।





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