बीकानेर. लाल झंडे और लाल बैनर जिन पर लिखे संगठनों के नाम। तख्तियों पर मुद्रित मांगें और सरकार के प्रति गुस्सेभरी इबारत।
एक हाथ से इन्हें थामे दूसरा हाथ भिंची मुठ्ठी के साथ हवा में लहराते हुए ‘मनमोहन सरकार-मुर्दाबाद’ नारे लगाते लोग जब रेलवे स्टेशन से कचहरी परिसर की ओर बढ़े तो सड़क के दोनों ओर खड़े होकर लोग इस कारवां को देखने लगे। मौका था अभियान समिति की ओर से केन्द्र सरकार की नीतियों के विरोध में निकाले गए जुलूस का।
कर्मचारी, श्रमिक, छात्र, एमआर, नौजवान सभा एवं महिला प्रतिनिधियों का यह जुलूस रेलवे स्टेशन से राजीव गांधी मार्ग, सट्टा बाजार, कोटगेट, महात्मा गांधी मार्ग होता हुआ कचहरी परिसर पहुंचा और पूरे परिसर का चक्कर लगाने के बाद जिला कलेक्टर कार्यालय के आगे सभा शुरू हो गई।
इस सभा में वक्ताओं ने जहां केन्द्र की आर्थिक और श्रम नीतियों को जनविरोधी बताया वहीं इसके विरोध में सभी श्रम व कर्मचारी संगठनों से विचाराधारा के तौर पर तालमेल बिठाते हुए संयुक्त संघर्ष करने का आह्वान भी हुआ। वक्ताओं ने केन्द्र की नीतियों को अमेरिका परस्त बताते हुए इसी के परिणाम स्वरूप महंगाई बढ़ने का आरोप लगाया।
इनकी रही अगुवाई : ऑल इंडिया बैंक एम्पलाइज एसोसिएशन की केन्द्रीय कार्यकारिणी के सदस्य एवं अभियान समिति के संयोजक का.वाई.के.शर्मा, बैंककर्मी नेता एस.के.बिस्सा, वी.के.शर्मा, एटक के का.प्रसन्न कुमार, अब्दुल रहमान, द्वारका प्रसाद, रूपकिशोर, भगवान सिंह, कल्याण सिंह, मंगतूराम, जाहिद हुल, रोडवेजकर्मी व एटक के नेता का.रामेश्वर शर्मा, सीटू के का. रामदेवसिंह और जीवराज सिंह, मदनसिंह राजपुरोहित एलआईसी के योगेश किरोड़ी, एमआर यूनियन के का.अंजनी कुमार, एसएफआई के का.रामगोपाल बिश्नोई, जनवादी नौजवान सभा के का.बजरंग छींपा, महिला प्रकोष्ठ की संयोजिका का.नीलम मेहरा आदि ने जुलूस की अगुवाई की वहीं इनमें से अनेक नेताओं ने सभा को संबोधित भी किया।
ये हैं मुख्य मांगें
>> मूल्यवृद्धि रोकने के लिए सार्वजनिक वितरण प्रणाली की दुकानों को सर्वसुलभ बनाना, पेट्रोल-डीजल पर कम करना,आवश्यक वस्तुओं के अग्रिम और अग्रप्रसारित व्यापार पर प्रतिबंध, कालाबाजारी के विरुद्ध सीधी कार्रवाई।
>> न्यूनतम वेतन, कार्य समय, सामाजिक सुरक्षा और औद्योगिक सुरक्षा संबंधी सभी कानूनों का कड़ाई से पालन।
>> संसद में लंबित असंगठित क्षेत्र कामगार सामाजिक सुरक्षा विधेयक के दायरे का विस्तार कर इसमें गरीबी रेखा से नीचे और ऊपर सभी असंगठित कामगारों को लाभ दिलाया जाए।
>> किसानों के ऋण योजना को खानगी ऋणदाताओं के लिए विस्तार किया जाए तथा राष्ट्रीयकृत बैंकों को किसानों के लिए न्यूनतम ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध करवाया जाए।
>> सरकारी सेवाओं पर प्रतिबंध हटे, छठे वेतन आयोग की नकारात्मक सिफारिशों और भेदभावपूर्ण स्वरूप को हटाया जाए। ग्रामीण डाक सेवकों का नियमितीकरण कर पेंशन की मंजूरी दी जाए।
>> ठेका कामगारों के लिए बिना शर्त वेतन-वार्ता आरंभ की जाए।