कोटा. सिमी के जन्म के साथ ही कोटा के कई लोग उससे जुड़े। प्रतिबंध के बाद पिछले ढाई वर्ष से उसने कोटा को अपनी शरणस्थली बना लिया। कोटा के सिमी कार्यकर्ताओं के हूजी से संबंधों की बात सामने आई।
खुफिया तंत्र ने कोटा को जांच का केन्द्र बना लिया है। जयपुर व अहमदाबाद में सीरियल ब्लास्ट की जांच में ऐसे तथ्य सामने आए, यह साबित हो गया कि सिमी ने कोटा को केंद्र बनाया हुआ था।
यहां के कार्यकर्ता आईएसआई और हूजी के सम्पर्क में भी रहे हैं। गुजरात पुलिस की गिरफ्त में आए सादिक मंसूरी व इमरान शेख ने भी पूछताछ में इन बातों की पुष्टि की है।
रोज बात होती है पाकिस्तान
जांच एजेंसियों ने जब कोटा से पाकिस्तान होने वाले टेलीफोन व मोबाइल फोन की कॉल डिटेल निकलवाई तो वे चौक गए। प्रतिदिन यहां से कई पाकिस्तान फोन आते-जाते रहे हैं। अकेले पुलिस लाइन के केसरबाग व घंटाघर के मकबरा इलाके से एक माह में 70 से अधिक बार पाकिस्तान फोन किए गए।
अब जांच इस बात की जा रही है कि यहां के कितने लोगों के रिश्तेदार पाकिस्तान में हैं और जो फोन कॉल्स किन-किन के बीच हुई है।
विदेश से बार-बार आने वालों की सूची तैयार
जांच एजेंसियां उन लोगों की भी तस्दीक करने में जुटी हुई है कि ऐसे कौन लोग हैं जो घूमने के लिए बार-बार कोटा आते रहे हैं।
कोटा में हुआ कार्यकर्ता सम्मेलन
वर्ष 2006 में सिमी ने मध्यप्रदेश, केरल व गुजरात में सक्रिय अपने कार्यकर्ताओं का कोटा में एक सम्मेलन कराया था। इसमें खुद सादिक मंसूरी मौजूद था। इसके बाद ही कोटा को केंद्र के रूप में चुना गया। सादिक ने इसके प्रचार-प्रसार के लिए सामग्री का प्रकाशन भी कोटा से ही कराया, जिसमें प्रमुख रूप से तहरीक-ए- मिल्लत पुस्तक थी, जिसके कारण मप्र के खंडवा शहर में साम्प्रदायिक दंगे हुए थे।
कोटा, जयपुर में रहने व मिलने की पुष्टि हुई
जांच में इन बातों की पुष्टि हो गई है कि सादिक मंसूरी भी यहां किराए से रहा था। राशीद डॉ. अबरार के साथ हॉस्टल में ठहरा था। डॉ. इस्हाक का पुत्र तौफीक उर्फ तौकीर जब कीडनी में स्टोन का इलाज कराने जयपुर गया था तब उसकी मुलाकात राशिद से हुई थी।