जयपुर. राज्य सरकार ने पेट्रोल पर 4 रु., डीजल पर 3 और रसोई गैस सिलेंडर पर 25 रु. तक कम करने की तैयारी कर ली है। विधानसभा चुनाव को देखते हुए मुख्यमंत्री सचिवालय ने इस तरह का प्रस्ताव तैयार किया है।
हालांकि आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने वित्त विभाग से पूछा है कि क्या एस.एन. गुप्ता कमेटी की ओर से दिए गए सुझाव से ज्यादा छूट दी जा सकती है। वित्त विभाग के अधिकारी अब इस बात की आंकड़ेबाजी में उलझे हुए हैं कि इससे कितनी बिक्री बढ़ेगी और सरकार को किसी तरह की राजस्व हानि तो नहीं होगी।
सूत्रों के अनुसार सरकार डीजल पर ज्यादा राहत देने के पक्ष में है, ताकि इसका सीधा असर आम उपभोग की वस्तुओं पर भी पड़े। चुनाव में इसे महंगाई कम करने के रूप में भुनाया जा सके। प्रतिशत में डीजल पर वैट में ज्यादा कमी की जाएगी तो डीजल पर 2.50 से 3 रु. प्रति लीटर तक असर आएगा। उल्लेखनीय है कि एस. एन. गुप्ता कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में पेट्रोल-डीजल पर 2-2 रुपए और रसोई गैस सिलेंडर पर 10 रुपए कम करने की सिफारिश कर रखी है।
पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन ने पेट्रोल पर वैट 28 से घटाकर 20 और डीजल पर 20 से घटाकर 15 प्रतिशत करने की मांग कर रखी है। इस बीच मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद पेट्रोलियम डीलर्स की मांगों पर विचार करने के लिए बनाई गई एस. एन. गुप्ता कमेटी ने गुरुवार को पेट्रोलियम व्यवसायियों और ट्रांसपोर्टर्स के साथ इस मुद्दे पर मीटिंग की।
मीटिंग में पेट्रोलियम डीलर्स ने पड़ोसी राज्यों से तुलना करते हुए प्रजेंटेशन दिया और बताया कि यदि सरकार वैट दरों में कमी करती है तो राज्य में तेल की बिक्री बढ़ जाएगी और सरकार को मिलने वाले सालाना राजस्व पर कोई ज्यादा फर्क नहीं आएगा। मीटिंग में पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन और वित्त विभाग के आंकड़ों में कुछ अंतर रहा।
इस पर पेट्रोलियम डीलर्स से पुन: जानकारी मांगी गई है कि पड़ोसी जिलों में कितनी बिक्री बढ़ेगी और सरकार को कितना राजस्व मिलेगा। इसके बाद कमेटी पुन: सभी तेल कंपनियों, पेट्रोलियम डीलर्स, ट्रांसपोर्टर्स के साथ मीटिंग करेगी।
वार्ता सकारात्मक दौर में
पेट्रोलियम डीलर्स और ट्रांसपोर्टर्स के साथ गुरुवार को हुई मीटिंग में वार्ता सकारात्मक रही। पेट्रोलिमय डीलर्स की ओर से दिए गए कुछ आंकड़े सरकारी आंकड़ों से नहीं मिल रहे थे। इसलिए पेट्रोलियम डीलर्स से कुछ और जानकारियां मांगी गई हैं। बाद में संबंधित सभी तेल कंपनियों के प्रतिनिधियों से भी बात की जाएगी। उसके बाद पेट्रोल-डीजल पर वैट में कमी करने के बारे में कुछ निर्णय किया जा सकेगा।
-एस.एन. गुप्ता, अध्यक्ष वैट अभाव अभियोग निराकरण समिति
चुनावी बोझ में दबी कीमतें
प्रदेश में चुनाव रूपी ओलिंपिक में पदक जीतने के लिए वसुंधरा सरकार ने तैयारी शुरू कर दी है। कर्मचारियों को रिझाने का दमखम व गैस, डीजल और पेट्रोल की दरें कम करने का कौशल दिखाया जा रहा है।
दरों का कौशल
राज्य में होने वाले विधानसभा चुनावों के मद्देनजर सरकार ने पेट्रोल पर 4 रुपए, डीजल पर 3 रु. प्रतिलीटर और गैस सिलेंडर पर 25 रु. तक कम करने का प्रस्ताव तैयार कर लिया है। एस.एन. गुप्ता कमेटी द्वारा दिए गए सुझाव से ज्यादा छूट देने का कौशल भी दिखाने की तैयारी की जा रही है। वित्त विभाग के अधिकारी इस बात की आंकड़ेबाजी में उलझे हुए हैं कि सरकार को किसी तरह की राजस्व हानि तो नहीं होगी।
गजब का गणित
देश की ज्यादातर सरकारों ने पेट्रोल-डीजल और गैस के दामों में बहुत पहले ही कमी कर दी थी। सरकार ने लंबे समय से फैसला टाल रखा था। अब जब आचार संहिता लागू होने में कम ही दिन बचे हैं तो सरकार ने यह पासा फेंका है। सरकार यदि 5 जून को यदि पेट्रोल पर 4 और डीजल पर 2.50 रुपए लीटर की ही कमी कर देती तो प्रदेशवासियों को अब तक 77 दिन में पेट्रोल पर 738.7 करोड़ रुपए व डीजल पर 2841.99 करोड़ रुपए की बचत होती। गैस का गणित अलग है।
दावों का दमखम
वसुंधरा सरकार ने १५ अगस्त पर राज्य कर्मचारियों के लिए पांच दिन का सप्ताह करने की घोषणा कर कर्मचारियों को रिझाने की घोषणा की।
दम कितना
इस घोषणा से कर्मचारियों को तो सरकार खुश कर गई, लेकिन सरकारी कर्मचारी आम जनता से ज्यादा दूर हो जाएगा। सर्वाधिक कर्मचारी शिक्षक हैं, लेकिन सरकार उनके बारे में कुछ नहीं बोली।
एक महीने का लॉन्ग जम्प
केंद्र की ओर से छठे वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करने की घोषणा के दिन ही सरकार ने लंबे समय से रुका हुआ छह प्रतिशत महंगाई भत्ता देने की घोषणा की। एक महीने बाद आयोग की सिफारिशों पर विचार करने का लॉन्ग जम्प लगाया।
क्वालीफाई क्यों?
सच्चई यह थी कि सरकार को डीए की घोषणा तो करनी ही थी। आंदोलन शुरू हो गए थे। वेतन आयोग की सिफारिशों पर विचार मजबूरी हो गया।