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Madhya Pradesh
Gwalior Gwalior ग्वालियर. जीवाजी विश्वविद्यालय के फार्मेसी संस्थान से क्लीनिकल पैथोलॉजी का पीजी डिप्लोमा करने वाले छात्र मुसीबत में फंस गए हैं। मप्र पैरामेडिकल काउंसिल ने पासआउट छात्रों का पंजीयन करने से इनकार कर दिया है। ऐसी स्थिति में एक सैकड़ा से अधिक छात्र सरकारी नौकरी पाने से वंचित हो रहे हैं।
पंजीयन के लिए छात्र कभी विश्वविद्यालय तो कभी पैरामेडिकल काउंसिल के चक्कर काट रहे हैं लेकिन उन्हें न्याय नहीं मिल रहा है। पासआउट छात्रों का इससे जहां एक साल बर्बाद हो गया है वहीं शैक्षणिक शुल्क के रूप में चुकाए गए करीब 30 हजार रुपए व्यर्थ चले गए हैं।
जीवाजी विश्वविद्यालय ने वर्ष 1997 में एक वर्षीय क्लीनिकल पैथोलॉजी पीजी डिप्लोमा पाठ्यक्रम प्रारंभ किया था। पाठ्यक्रम की 30 ओपन व पांच पेमेन्ट सीट्स थीं। पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए न्यूनतम अर्हता साइंस में स्नातक उपाधि आवश्यक थी।
वर्ष 2002 तक संस्थान के पासआउट छात्रों के पंजीयन के लिए शासन की कोई संस्था अस्तित्व में नहीं थी। वर्ष 2002 में शासन ने मप्र पैरामेडिकल काउंसिल का गठन किया। क्लीनिकल पाठ्यक्रम संचालन के लिए काउंसिल से मान्यता लेना अनिवार्य कर दिया गया।
विश्वविद्यालय ने मान्यता नहीं ली और वर्ष 2006 तक पाठ्यक्रम का संचालन जारी रहा। पासआउट छात्रों ने जब पंजीयन के लिए काउंसिल में आवेदन किया तो उसने इनकार कर दिया।
छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन को इससे अवगत कराया। विश्वविद्यालय ने काउंसिल से जब पत्राचार किया तो जवाब मिला कि उनकी सूची में यह पाठ्यक्रम मान्य नहीं है, इसलिए पंजीयन नहीं किया जा सकता।
मामले की जानकारी ली जा रही है। पैरामेडिकल काउंसिल से पत्र व्यवहार किया जाएगा।
-प्रो. एके कपूर, कुलपति
काउंसिल का गठन 2002 में हुआ है जबकि विवि यह पाठ्यक्रम 97 से चला रहा था। पंजीयन न करने पर काउंसिल से पत्र व्यवहार किया गया लेकिन उचित जवाब नहीं मिला। ऐसी स्थिति में विवि ने यह पाठ्यक्रम बंद कर दिया है।
-डॉ. डीडी अग्रवाल, पूर्व डायरेक्टर, फार्मेसी संस्थान