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शिक्षाकर्मियों का मेगा ब्लाक

रायपुर. राज्यभर से अपनी एकसूत्री मांग को लेकर गुरुवार को राजधानी में जुटे शिक्षाकर्मी सीएम हाउस नहीं घेर पाए, लेकिन उन्होंने बूढ़ा तालाब मार्ग पर मेगा जाम लगा दिया।

लाठियों से लैस पुलिस के कड़े सुरक्षा घेरे के बीच वे दोपहर 2.30 बजे से आधी रात बाद तक वहां डटे रहे। शुक्रवार को सीएम से मुलाकात का भरोसा दिलाए जाने के बाद उन्होंने धरनास्थल पर ही रात गुजारने के बाद वहां जाने का फैसला किया।

सप्रे स्कूल और स्पोर्ट्स कांप्लेक्स के पास सुबह से शिक्षाकर्मियों की भीड़ पहुंच चुकी थी। दोपहर को उन्होंने सप्रे स्कूल से सीएम हाउस कूच का ऐलान किया और जैसे ही आगे बढ़े, पुलिस के जवान अलर्ट हो गए। शिक्षाकर्मियों ने बूढ़ातालाब के चारों ओर चक्कर लगाए, लेकिन जब श्यामटाकीज तिराहे से सीएम हाउस की ओर बढ़े, सभी को रोक दिया गया।

सिटी एसपी डा. लाल उमेद सिंह, एएसपी क्राइम अजातशत्रु बहादुर सिंह, ग्रामीण एसपी प्रशांत ठाकुर समेत आधा दर्जन आला अफसरों ने शिक्षाकर्मियों को समझाने की कोशिश की। अध्यक्ष संजय शर्मा से कहा गया कि वे एक प्रतिनिधि मंडल लेकर मुख्यमंत्री से मिलने जा सकते हैं। एडीएम रमेश शर्मा और डिप्टी कलेक्टर केके बक्क्षी ने समझाने की कोशिश की, लेकिन अध्यक्ष तैयार नहीं हुए। वे साथियों को लेकर सीएम हाउस जाने की मांग पर अड़े रहे। इजाजत नहीं मिलने पर सभी सड़क पर धरना देकर बैठ गए।

शिक्षा कर्मी संघ ने करीब एक हफ्ते पहले ही सीएम हाउस घेराव का ऐलान कर दिया था। रैली में शामिल होने के लिए राज्य के विभिन्न शहरों से शिक्षाकर्मी सुबह 10 बजे से पहुंचने लगे थे। पुलिस ने बूढ़ातालाब बिजली आफिस चौराहे से सप्रे शाला मैदान जाने वाली रोड को बेरीकेड लगाकर बंद कर दिया था। श्याम टाकीज तिराहे से स्कूल आने वाला रास्ता भी बंद कर दिया गया था। इसके बावजूद शिक्षाकर्मी बाई पास सड़कों व गलियों से होकर स्कूल के मैदान में इकट्ठा हो गए। दोपहर 2 बजे तक सैकड़ों शिक्षा कर्मी जमा हो गए।

उसके बाद शिक्षाकर्मियों ने सीएम हाउस घेरने के लिए रैली निकाली। पुलिस और जिला प्रशासन ने उन्हें बूढ़ातालाब के चारों ओर चक्कर लगाकर वापस सप्रे मैदान जाने की अनुमति दी थी। सप्रे मैदान से निकलकर शिक्षाकर्मी दानी गल्र्स स्कूल के पीछे वाली रोड से होकर नेहरुनगर पहुंचे। पुलिस ने इस रोड को भी सील कर दिया था।

मजबूरी में शिक्षा कर्मियों को मारवाड़ी श्मशानघाट वाली रोड की तरफ जाना पड़ा। वे वहां से ब्रम्हपुरी होकर श्याम टाकीज के करीब तिराहे पर पहुंचे। गौरतलब है कि राज्यभर के शिक्षाकर्मी पिछले 17 दिनों से कक्षाओं का बहिष्कार करके हड़ताल पर हैं। शिक्षाकर्मियों की हड़ताल से सरकारी स्कूलों में पढ़ाई लगभग ठप है।

स्कूल छावनी में तब्दील
पुलिस ने सप्रेशाला मैदान को चारों तरफ से सील करने के साथ छावनी में बदल दिया था। तीन अतिरिक्त पुलिस अधीक्षकों और पांच नगर पुलिस अधीक्षकों के नेतृत्व में दर्जनभर थानेदार करीब 300 जवानों के साथ सुबह 10 बजे से तैनात थे। पुलिस के अफसर और जवान किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार थे। पुलिस को आशंका थी कि शिक्षाकर्मी कहीं बेरिकेड्स तोड़ने की कोशिश न करें, इसलिए वहां पूरा दस्ता तैनात था।

शिक्षा के दलालों..से बिगड़ी बात
शिक्षाकर्मियों के पदाधिकारियों ने सप्रेस्कूल मैदान में करीब तीन घंटे तक संबोधित किया। इस दौरान किसी शिक्षाकर्मी ने आपत्तिजनक नारा लगा दिया। इससे कुछ शिक्षाकर्मियों ने घेरकर जमकर धुनाई कर दी। इससे कुछ देर के लिए भगदड़ की स्थिति बन गई थी। पंडाल के बाहर खड़े शिक्षाकर्मी कोई घटना समझकर इधर-उधर भागने लगे थे। सप्रेशाला मैदान में 15 अगस्त के मौके पर आयोजित जलसे के लिए मैदान में विशाल पंडाल लगाया गया था। शिक्षाकर्मियों ने उसका पूरा उपयोग किया और सभा ली।

डटी रहीं महिलाएं भी
शिक्षाकर्मी देर रात तक धरने पर डटे थे। आंदोलन में महिला शिक्षाकर्मियों ने भी कंधे से कंधा मिलाकर साथ दिया। रात तक महिलाएं रोड पर चक्काजाम करके बैठी थीं। कुछ महिलाएं बच्चों को साथ लेकर आई थीं। धरना स्थल पर शिक्ष कर्मियों को खाने-पीने को कुछ नहीं मिल रहा था। भीड़ देखकर चाट के ठेले वाले पहुंच गए थे। कुछ फल वाले भी आ गए।

शिक्षा संचालनालय का घेराव
शिक्षाकर्मियों के दूसरे गुट शालेय व संयुक्त शिक्षाकर्मी संघ ने गुरुवार को शिक्षा संचालनालय का घेराव किया। शिक्षा संचालक को ज्ञापन सौंपने के बाद प्रदर्शनकारी बूढ़ातालाबस्थित धरना स्थल पहुंच गए। संघ के प्रदेशाध्यक्ष केदार जैन, वीरेंद्र दुबे और संतोष तिवारी ने बताया कि शिक्षाकर्मी शुक्रवार को सुंदरपाठ करेंगे। 26 को राजधानी में जंगी प्रदर्शन किया जाएगा।

शिक्षाकर्मी वर्ग-3 के लिए प्रावधान नहीं
शिक्षाकर्मी वर्ग-3 की तरक्की के लिए सरकार ने कोई विकल्प नहीं रखा है। शिक्षाकर्मी वर्ग-1 के लिए हाई व हायर सेकेंडरी स्कूल के 25 प्रतिशत प्राचार्य पद आरक्षित हैं। वर्ग-2 के शिक्षाकर्मी भी प्राइमरी स्कूल के प्रधान पाठक बन सकेंगे। दोनों वर्ग के शिक्षाकर्मियों को प्रमोशन के लिए परीक्षा जरुर देनी होगी, पर वर्ग-3 के लिए ऐसा कोई रास्ता नहीं है। राजपत्र में इस नियम का प्रकाशन हो गया है।

छठवें वेतनमान के लिए राज्यभर के कर्मचारियों ने गुरुवार को तहसील स्तर से लेकर मंत्रालय तक कामकाज ठप रखा। दफ्तर सूने रहे, स्कूलों में भी सन्नाटा छाया रहा। यहां तक कि स्वास्थ्य सेवाओं पर भी आंशिक असर पड़ा। कर्मचारियों ने दोपहर फायर ब्रिगेड चौक पर सड़क जाम कर धरना दिया।

छठवें वेतनमान आयोग की सिफारिशें लागू करवाने के लिए छत्तीसगढ़ अधिकारी-कर्मचारी संयुक्त मोर्चा के बैनर तले 23 कर्मचारी संगठन एकजुट हुए। तहसील से लेकर मंत्रालय तक उच्चधिकारियों को छोड़कर सभी हड़ताल पर रहे। उन्होंने शहरों में प्रदर्शन भी किया। हमारे बिलासपुर कार्यालय के अनुसार अंबिकापुर से लेकर न्यायधानी बिलासपुर तक सरकारी कामकाज पूरी तरह ठप रहा। बस्तर में भी खासा असर रहा।

राजधानी में कर्मचारी दफ्तर छोड़कर सड़क पर उतर आए। 23 संगठनों से जुड़े अधिकारी, कर्मचारी दोपहर फायर ब्रिगेड चौक के सामने इकट्ठे हुए और 3 बजे तक धरना दिया। उन्होंने भविष्य की रणनीति भी तय की। यहां सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने साफ कहा कि छठे वेतन आयोग की सिफारिशें लागू नहीं होने की स्थिति में वे अनिश्कितकाल के लिए आंदोलन शुरू कर सकते हैं। मोर्चा के प्रवक्ता वीरेंद्र नामदेव का दावा है कि राज्यभर के दो लाख कर्मचारियों ने काम ठप रखा। अस्पतालों में आपात चिकित्सा को छोड़कर बाकी काम ठप रहे।

कलेक्टोरेट बंद : रायपुर कलेक्टोरेट के सभी 15 विभागों में तालाबंदी के हालात थे। सेल टैक्स, आबकारी, पंजीयक, कोषायल में कामकाज नहीं हुआ। रजिस्ट्री और टैक्स वसूली ठप रही। तृतीय शासकीय कर्मचारी संघ के प्रांताध्यक्ष पीआर यादव ने बताया कि दोपहर में कलेक्टर आए और थोड़ी देर रुककर चले गए। यहां पानी पिलाने के लिए चपरासी भी नहीं था। हमारे दुर्ग, भिलाई कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार लगभग सभी शासकीय दफ्तरों में अवकाश के हालात रहे। काम से आने वाले लोग हलाकान रहे।

सरकार का रुख सकारात्मक
मुख्य सचिव पी जाय उम्मेन ने बताया कि अभी केंद्र सरकार ने आदेश जारी नहीं किया है। मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह ने इस बारे में पहले ही सकारात्मक संकेत दे दिए हैं। केंद्र के आदेश के बाद इस मुद्दे पर विचार किया जाएगा। शासन के पास विचार के लिए कुछ आधार होना जरूरी है।

शिक्षाकर्मी अड़े
रायपुर. शिक्षक पद पर संविलियन की मांग को लेकर राजधानी में डटे राज्यभर के शिक्षाकर्मियों ने गुरुवार को बूढ़ातालाब मार्ग पर मेगा जाम लगाया। सीएम हाउस का घेराव करने में असफल होने के बाद दोपहर उन्होंने सड़क पर धरना शुरू किया। रात 11 बजे उन्हें बताया गया कि मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह ने शुक्रवार को सुबह 10 बजे मिलने का समय दिया है।

उसके बाद उन्होंने सड़क पर ही रात गुजारने का फैसला किया। उन्होंने सप्रे स्कूल में सभा के बाद दोपहर पुलिस फोर्स के घेरे में सड़क पर धरना शुरू किया और मुख्यमंत्री से मुलाकात के लिए अड़े रहे। प्रदर्शनकारियों में महिला शिक्षाकर्मी भी शामिल रहीं। वे भी डटी रहीं।





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