मुंबई.जनवरी में शुरू हुई भारतीय शेयर बाजार की गिरावट का राज जानना है तो विदेशी निवेशकों की बिकवाली के आंकड़े देख लीजिए। विदेशी निवेशकों (एफआईआई) ने इस साल 30,000 करोड़ रुपए से ज्यादा के शेयर बेच दिए हैं।
कच्चे तेल के दाम 111 डालर प्रति बैरल से उछलकर 122 डालर पर पहुंचने से एफआईआई की बिकवाली का नया दौर शुरू हुआ। इनकी बिकवाली 30,000 करोड़ रुपए का निशान पार कर गई है।
सेबी के आंकड़ों के मुताबिक विदेशी संस्थागत निवेशक इस साल साल म अब तक 30,679 करोड़ रुपए मूल्य की शुद्ध बिकवाली कर चुके हैं।
क्रूड की कीमतों में तेजी काले सागर में युद्ध के बादल मंडराने के कारण दिखी है। जॉर्जिया पर रूस और अमेरिका के बीच जारी वाकयुद्ध से आपूर्ति बाधित होने की आशंकाएं बढ़ीं हैं।
क्रूड की कीमतों में 111 डालर के न्यूनतम से तेजी का रुख बनने के बाद घरेलू शेयर बाजार में भारी गिरावट देखी गई है। एफआईआई 18,000 करोड़ रुपए से अधिक की शुद्ध बिकवाली कर चुके हैं। पहले एफआईआई ने इस साल में सबसे अधिक जनवरी में 17,227 करोड़ रुपए की बिकवाली की थी।
क्रूड की कीमतें 148 डालर के शिखर से 120 डालर तक नीचे आने के बीच सेंसेक्स में 1,500 अंक का सुधार दर्ज हुआ था।
अगस्त के पहले सप्ताह से शुरू हुई रैली में सेंसेक्स 12 अगस्त को 15,580 की ऊंचाई पर पहुंच गया था। इसके बाद एफआईआई की बिकवाली में तेजी आई। शुक्रवार को 158 अंक की बढ़त से बंद होने के बावजूद सेंसेक्स अब भी इस स्तर से 15,580 ऊंचाई से 1,178 अंक नीचे है।
धारणा में सुधार: के.आर. चौकसी सिक्यूरिटीज के वाइस प्रेसीडेंट, पीएमएस अजय पडवाल की राय में क्रूड में तेजी 148 डालर प्रति बैरल के शिखर से 30 डालर तक गिरने के बाद तकनीकी सुधार के कारण दिखी है। जून में जब क्रूड की कीमतें शिखर पर थीं तब धारणा बुरी तरह बिगड़ गई थी।
क्या होगा:
नौ अगस्त को समाप्त सप्ताह में महंगाई की दर 0.19 फीसदी बढ़कर 12.63 फीसदी हो गई है। एचडीएफसी सिक्यूरिटीज के हेड आफ रिटेल रिसर्च दीपक जसानी की राय में मुद्रास्फीति अपने शिखर के करीब हैर्। ईधन की कीमतें बढ़ती हैं तो अक्टूबर तक इसमें बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।