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मेडिकल छात्र अबरार को छोड़ा

जयपुर. जयपुर एवं अहमदाबाद में सीरियल बम ब्लास्ट के मुख्य आरोपी साजिद मंसूरी से संबंध रखने के आरोप में पूछताछ के लिए 6 दिन पहले हिरासत में लिए मेडिकल छात्र अबरार को एसआईटी ने शुक्रवार को छोड़ दिया। जांच में अबरार के आतंकियों से किसी तरह के संबंध सामने नहीं आए हैं। छह अन्य को भी छोड़ दिया गया।

विशेष जांच दल ने गत शनिवार की मेडिकल कॉलेज के सीनियर बॉयज छात्रावास के कमरा नंबर- 27 से पूछताछ के लिए हिरासत में लिया था। उस पर शक जाहिर किया गया था कि आतंकियों को अमोनियम नाइट्रेट सप्लाई करने व आतंकवादी साजिद मंसूरी से उसके संबंध हो सकते है। इसके बाद अबरार को एसओजी में रखा गया और उससे 6 दिन तक लंबी पूछताछ की जाती रही है। पूछताछ में वह दोषी नहीं पाए जाने पर एसओजी ने उसे शुक्रवार सुबह छोड़ दिया। यहां से उसे हॉस्टल भेजा गया।

अबरार दोषी नहीं : अबरार के साथ सीनियर बॉयज हॉस्टल वार्डन डॉ. गोरधन मीणा भी पुलिस वाहन में हॉस्टल आए। उन्होंने बताया कि एसओजी की जांच में अबरार दोषी नहीं पाया गया है।

उधर, माणक चौक पुलिस इंचार्ज मदन सिंह से जब मीडियाकर्मियों ने सवाल किए तो उन्होंने कहा कि वे इस बारे में कोई जवाब नहीं दे सकते। इस बारे में मामले की जांच कर रहे अधिकारी ही बता सकते है।

झूठी खबर को लेकर एक अखबार पर बरसे मेडिकल छात्र

अबरार को लेकर पुलिस छात्रावास पहुंची तो अन्य छात्र एकत्रित हो गए। इन छात्रों ने एक अखबार का नाम लेकर उसमें छपी झूठी खबर को पूरी डॉक्टर कौम को बदनाम करने वाली बताया। छात्रों ने कहा- इस अखबार ने मनगढं़त खबर दी, जिसका हैडलाइन था-‘एसएमएस हॉस्टल में रुके आतंकी, डॉक्टरों ने दिए विस्फोटक’। छात्र अड़ गए और वे अखबार से जवाब मांगते रहे। इससे माहौल तनावपूर्ण हो गया और उस अखबार के रिपोर्टरों को वहां से जाना पड़ा।

भास्कर हमेशा सच : जिस दिन मेडिकल हॉस्टल से अबरार को पुलिस ने उठाया उस दिन भास्कर ने भी खबर लगाई, लेकिन सिर्फ सच। पूरी जांच पड़ताल कर केवल तथ्य छापे।

पूरे डॉक्टर समुदाय को ठेस पहुंचाने वाला एक शब्द भी नहीं लिखा। जबकि विस्फोट के दिन से ही भास्कर लगातार आतंकवाद के खिलाफ अलख जगाए हुए है। मेडिकल छात्र जब एक अखबार पर बरस रहे थे, तभी वे भास्कर की सच खबर का उदाहरण भी दे रहे थे कि यह होती है पत्रकारिता।





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