जयपुर. जयपुर धमाकों की जांच कर रही स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। शुक्रवार को मेडिकल छात्र अबरार को छोड़ने के साथ ही मुस्लिम समुदाय में आक्रोश फैल गया।
समुदाय के कई लोगों का कहना है कि एसओजी निर्दोष लोगों को पकड़ कर उन्हें और समुदाय को बदनाम कर रही है। अब तक एसओजी करीब तीन सौ लोगों को हिरासत में ले चुकी है।
उधर, इस संबंध में एसओजी के प्रमुख एडीजी ए.के. जैन से जब-जब पूछा गया उन्होंने किसी भी व्यक्ति के पकड़ने के बारे में मना किया, लेकिन जब पकड़े गए व्यक्ति एसओजी की गिरफ्त से बाहर आए तब ही मामले का खुलासा हुआ।
जिन्हें भी पकड़ा, छोड़ना पड़ा
>> जांच एजेंसी ने सबसे पहले 1 जून को इन्फोसिस इंजीनियर राशिद कुरैशी को पकड़ा। एसओजी ने राशिद से बम ब्लास्ट में उसकी भूमिका होने के बारे में उससे नौ दिन तक पूछताछ की। राशिद का आरोप था कि पूछताछ के दौरान उसे बंधक की तरह रखा और प्रताड़ित किया गया। जब जांच एजेंसी को कुछ हाथ नहीं लगा तो 9 जून को यह धमकी देकर छोड़ दिया गया कि मीडिया से बात की तो गिरफ्तार कर लेंगे।
>> अहमदाबाद बम ब्लास्ट के खुलासे के बाद पुलिस ने दिल्ली में एमडी की पढ़ाई कर रहे निवाई के छात्र अनवर को पकड़ा। जांच एजेंसी ने उसे जयपुर लाकर कड़ी पूछताछ की, लेकिन कुछ हाथ नहीं लगा। अनवर ने मीडिया को बताया था कि पुलिस ने उससे बम ब्लास्ट के बारे में पूछा था।
>> एसएमएस मेडिकल हॉस्टल के कमरा नंबर 27 में रह रहे छात्र अबरार को पुलिस ने शनिवार रात हॉस्टल से पकड़ा। 6 दिन तक एसओजी ने उससे पूछताछ की और शुक्रवार को उसे छोड़ा। अबरार को किस संदिग्ध गतिविधि के कारण पकड़ा गया यह भी उसे नहीं बताया गया। उसे सिर्फ इतना कहा गया कि उसकी जयपुर सीरियल बम ब्लास्ट में संदिग्ध भूमिका है। पकड़े जाने के बाद अबरार को कोटा से आए उसके पिता व रिश्तेदारों से भी नहीं मिलने दिया गया।
>> पाली में एक छोटी से क्लीनिक चलाने वाले अमनुल्लाह को एसओजी ब्यावर के रूप नगर से पकड़कर ले गई। उस पर बम ब्लास्ट के मामले में ई-मेल भेजने का आरोप है। अमानुल्ला कहां है, इस बारे में एसओजी वाले कुछ भी नहीं बता रहे हैं।
>> एसओजी ने भरतपुर शहर काजी को बम ब्लास्ट के मामले में पकड़ा। कई दिनों तक कड़ी पूछताछ की। बाद में उसे फर्जी पासपोर्ट के मामले में गिरफ्तार किया गया।
>> जयपुर के दो डॉक्टरों को एसओजी ने पूछताछ के लिए बुलाया। मुस्लिम समुदाय के लोगों ने इसका विरोध किया तथा डीजीपी से मिले। इसके बाद डॉक्टरों को छोड़ा गया।
>> एसओजी ने अभी कोटा, अजमेर, जयपुर के पांच-छह मुस्लिम युवकों को पकड़ रखा है। इन पर बम धमाकों में शामिल होने का आरोप है, लेकिन एसओजी यह नहीं बता पा रही है कि बम ब्लास्ट में उनकी कैसी संदिग्ध भूमिका है।
किया जा रहा है बदनाम
मिल्ली काउंसिल राजस्थान के प्रवक्ता एडवोकेट मुजाहिद नकवी का कहना है कि एसओजी की इस तरह की कार्रवाई से भारत के सारे मुसलमान बदनाम हो रहे हैं। जयपुर बम ब्लास्ट की जांच में पुलिस पूरी तरह विफल रही है।
‘निर्दोषों को नहीं पकड़ते’
पुलिस महानिदेशक के.एस. बैंस ने कहा कि हम निर्दोष को नहीं पकड़ते। शक के आधार पर पूछताछ के लिए बुलाते हैं। जब उनसे पूछा गया कि इसी पूछताछ के नाम पर कई निर्दोष बदनाम हो गए तो उनका कहना था कि बदनाम हमने थोड़े ही किया है। न ही हमने किसी को बताया कि किसे पूछताछ के लिए बुलाया है।