जयपुर. जयपुर सहित पूरे देश में गुरुवार रात लांच हुए आईफोन की कीमत व कमियां लोगों को खल रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि एपल जैसी रिसर्च बेस्ड कम्पनी ने ये सभी कमियां जानबूझ कर फोन में रखी हैं। ताकि उनकी मोनोपॉली बनी रहे और कम्पनी बाद में और सुविधाएं देकर ज्यादा मुनाफा कमाए। ज्यादातर फीचर्स अमेरिकी बाजार के लिए डिजाइन किए गए थे, इन्हें भारत के लिए बदला ही नहीं गया।
विशेषज्ञों ने बताया- क्यों हैं कमियां
मोबाइल यूजर्स के दिमाग में इन कमियों को लेकर बहुत से सवाल हैं, जिनके जवाब के लिए सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स की टीम ने भास्कर के लिए दिए। आईफोन में फाइल्स कॉपी पेस्ट क्यों नहीं कर सकते। एमएमएस को सपोर्ट नहीं, एसएमएस भी फारवर्ड नहीं कर सकते।
एडॉबी की फ्लैश टैक्नोलॉजी को सपोर्ट क्यों नहीं करता?
ये तीनों ही कमियां मात्र कुछ सॉफ्टवेयर की वजह से आईफोन में रखी गई हैं। एपल जब आईफोन को भारी संख्या में ग्राहकों को बेच लेगा, तब ऐसे सॉफ्टवेयर लान्च करेगा , जिनसे उपभोक्ता को ये सब सुविधाएं भी मिल सके। लेकिन इन सॉफ्टवेयर्स के लिए फोन यूजर को अलग से पैसा चुकाना पड़ेगा।
आईफोन में वीडियो रिकॉर्डिग क्यों नहीं?
अमेरिका में ज्यादातर लोग हैंडीकैम इस्तेमाल करते हैं, ऐसे में उन्हें मूवी कैमरा की जरूरत मोबाइल में नहीं होती।
ब्लू टूथ से फाइलें शेयर क्यों नहीं होती?
ब्लू टूथ का इस्तेमाल भी अमेरिका में सीमित है और वायरस जैसी समस्याओं की वजह से यह कई कानूनी दायरों में है। भारत में लान्च करने से पहले एपल ने आईफोन को भारतीय बाजार के हिसाब से बदला नहीं है।
एफएम क्यों नहीं है?
अमेरिका में एफएम चलता ही नहीं है, तो इसे भारत में भी देने की जरूरत नहीं समझी गई। जबकि यहां हर सस्ते फोन में भी एफएम उपलब्ध है।
एमपीथ्री रिंग टोन्स यूज क्यों नहीं कर सकते?
कारण सीधा-सीधा है, आईफोन में संगीत आईट्यून के रूप में डाउनलोड करना होगा। जो एपल कंपनी के स्टोर से खरीदना पड़ेगा या एमपीथ्री को आईट्यून में कन्वर्ट करने के लिए सॉफ्टवेयर खरीदना पड़ेगा। कम्पनी ने ज्यादा पैसा कमाने के लिए ऐसा किया।
आईफोन जावा इनेबल्ड नहीं है?
आईफोन के लिए एपल ने अलग ऑपरेटिंग सिस्टम तैयार किया है, जिससे कि यह दूसरे कम्प्यूटर्स व फोन्स से अलग हो, इसे इस्तेमाल करने के लिए एपल के सॉफ्टवेयर ही खरीदने पड़ें।
बैटरी खराब हो जाने पर क्या करें?
बैटरी खराब होने पर आपको नया फोन ही खरीदना पड़े।
तीसरे का दखल नहीं
एपल थर्ड पार्टी रिस्ट्रिक्शन भी रखता है। जिनसे एपल का कॉन्ट्रेक्ट है, केवल उन्हीं कम्पनियों के सॉफ्टवेयर व सिम काम करेंगे। यही कारण है कि बैटरी व सिम लॉक है। एडोबी फ्लेश प्लेयर जैसे कई सॉफ्टवेयर आईफोन में काम नहीं कर रहे हैं।
भारत में किंग है कंज्यूमर
आईफोन इस्तेमाल करते समय उपभोक्ताओं को कई बेसिक अधिकारों से वंचित कर दिया जाता है। जैसे कि अपना नम्बर बदलना या मोबाइल सर्विस प्रोवाइडर कम्पनी बदलना। आईट्यून की बजाय नेट से मुफ्त गीत लेना। देश में ट्राई जिस तरह की आजादी ग्राहक को दे रही है, आईफोन इससे उन्हें वंचित कर रहा है।
कीमतों के क्या कहने
आईफोन की कीमत बहुत ज्यादा रखी गई है। प्राइस सेन्सिटिव भारत में उपभोक्ता के लिए कीमत बड़ा मामला है। अमेरिका में आईफोन पहले 8,000 रुपए और बाद में 16,000 में दिया गया, लेकिन भारत में यही फोन 31,000 रुपए से शुरू किया गया। भारती एयरटेल के प्रेजिडेंट (मोबाइल सर्विसेज) संजय कपूर अमेरिका और भारत में कीमत की तुलना को सही नहीं मानते हैं। वे कहते हैं कि अमेरिका में यह कीमत दो साल के लिए एयरटाइम कांट्रेक्ट के साथ है, जबकि भारत में हम उपभोक्ता को ऐसी किसी शर्त के साथ नहीं बांध रहे हैं।
फिलहाल फायदा नहीं थ्रीजी का
3 जी सेवाओं के शुरू होने के कारण इसका बेहतर उपयोग नहीं हो पाएगा। यह कहना है बीएसएनएल के जीएम ब्रॉडबैंड अनुपम श्रीवास्तव का। श्रीवास्तव कहते हैं कि बीएसएनएल दिसम्बर तक 3जी सेवाएं शुरू करेगा।