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Chhattisgarh
Raipur Raipur रायपुर. छत्तीसगढ़ी के शब्दकोष में किसी भी शब्द का मतलब हिंदी ही नहीं, अंग्रेजी में भी बताया जाएगा। जैसे, पताल के लिए हिंदी में टमाटर और अंग्रेजी में टोमेटो लिखा जाएगा और इसकी तस्वीर भी होगी। यह सब एक पुस्तक में होगा, जिसे ‘छत्तीसगढ़ी शब्दकोष’ का नाम दिया जा रहा है।
राज्य में पहली बार छत्तीसगढ़ी शब्दकोष तैयार किया जा रहा है। इसमें 5000 शब्द और 500 लोकोक्तियां होंगी। इस किताब के लिए एससीईआरटी (राज्य शैक्षिक अनुसंधान परिषद) ने छत्तीसगढ़ी के जानकार शिक्षकों, लेखकों, गायकों और कलाकारों का दल बनाया है।
शब्दकोष वे ही तैयार करेंगे। यह मिडिल स्कूल के बच्चों के लिए बन रहा है और बाजार में छत्तीसगढ़ी का पहला अधिकृत शब्दकोष होगा। कठिन शब्दों को चित्र से समझाया जाएगा। शब्दकोष में 1500 चित्र होंगे। इसमें छत्तीसगढ़ी व्याकरण का भी जिक्र होगा, अर्थात बताया जाएगा कि दिया गया शब्द संज्ञा है, सर्वनाम या विशेषण है।
विशेषज्ञ बीआर साहू और माधुरी पाठक ने बताया कि सर्वे में कई दिलचस्प बातें सामने आईं। जैसे हिंदी के शब्द छेद को ही लें। छत्तीसगढ़ में सिर्फ इसी शब्द के सात पर्यायवाची हैं। इनमें सांसी, भुलका, तोंडू, तोड़का, भोंड़का, भोंगड़ा और भरभंगा हैं। ऐसे भी शब्द मिले जिनके अंग्रेजी और छग में उच्चरण समान हैं जैसे सासर (प्लेट) और पोलखा (पोलका-ब्लाउज) आदि। सर्वे में सब्जियों और भाजियों के 100-100 से ज्यादा नाम मिले। रोटी के भी सौ से ज्यादा प्रकार मिले।
नौ जिलों में सर्वे : विशेषज्ञों ने 9 जिलों में सर्वे कर बच्चों और लोगों से मिलकर हजारों शब्द और मुहावरे जुटाए। ये जिले हैं रायपुर, बिलासपुर, रायगढ़, जांजगीर-चांपा, महासमुंद, धमतरी, दुर्ग, कोरबा और कांकेर। इस काम में डा. परदेसीराम वर्मा, डा. रमेंद्रनाथ मिश्र, समन्वयक बीआर साहू व माधुरी पाठक, बसंत देशमुख, भूषण परगनिया, रामप्यारे पारकर, दिनेश गौतम, रविशेखर वर्मा, स्वाति द्विवेदी, सरोज यादव, शीला तिवारी, खूबचंद सरसिहा, आरएस बघेल और सच्चिदानंद शास्त्री लगे हैं।
यह राज्य बनने के बाद सबसे महत्वपूर्ण कार्य हो रहा है। शब्दकोष बनाने का प्रयास दूरगामी परिणाम देगा।
-डा. परदेसीराम वर्मा, साहित्यकार
बच्चों को पहली बार छत्तीसगढ़ी से सीधे अंग्रेजी और फिर हिंदी में शब्दज्ञान का मौका मिलेगा। इससे उनकी अंग्रेजी भी सुधरेगी। ये काम पारंपरिक शब्कोषों से हटकर बच्चों की मानसिकता को ध्यान में रखकर किया जा रहा है।’
-नंदकुमार, संचालक एससीईआरटी