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11 सौ स्कूलों में लटके ताले घर

बिलासपुर. शिक्षाकर्मियों एवं राज्य सरकार की जिद स्कूली छात्रों का भविष्य दांव पर लगा रही है। प्रायमरी, मिडिल, हाई एवं हायर सेकेंडरी स्कूलों को मिलाकर जिले के 4 हजार 38 स्कूलों में 1 हजार 116 स्कूल ऐसे हैं, जहां तालेबंदी है। ऐसी स्थिति में यहां पढ़ने वाले 93 हजार छात्र-छात्राओं को अकारण घर बैठना पड़ रहा है।

कहने को तो जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग ने स्कूलों में पढ़ाई सुचारू रखने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की है, लेकिन मौके पर जाकर देखें तो नजारा ही अलग है। सूत्रों के मुताबिक कई स्कूल तो ऐसे भी हैं, जिन्हें केवल मध्याह्न् भोजन बनाने के लिए खोला जा रहा है, ताकि मध्याह्न् भोजन के नाम पर फर्जी बिल का भुगतान प्राप्त किया जा सके। सरकार द्वारा की गई संविलियन संबंधी घोषणा को लेकर पिछले 18 दिनों से चल रही शिक्षाकर्मियों की हड़ताल लगातार जारी है।

हड़ताल में जिले के 11 हजार शिक्षाकर्मियों सहित राज्य के 1 लाख 10 हजार शिक्षाकर्मियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई है। हड़ताल की शुरुआत तो केवल परिवीक्षा अवधि पार कर चुके शिक्षाकर्मियों ने की, पर बाद में परिवीक्षा अवधि एवं नवनियुक्त शिक्षाकर्मी भी इससे अलग न रह सके।

स्कूलों में 31 जुलाई तक प्रवेश की प्रक्रिया चलती है, वहीं अगस्त के पहले सप्ताह से पढ़ाई शुरू हो जाती है। इधर इस वर्ष पढ़ाई की शुरुआत होते ही शिक्षाकर्मियों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल भी शुरू कर दी। शिक्षासत्र के शुरुआती दौर में ही हड़ताल से स्कूलों में पढ़ाई पूरी तरह ठप हो गई है।

पढ़ाई हो न हो, ताला न लगे
जिला प्रशासन एवं शिक्षा विभाग द्वारा स्कूलों में शिक्षकों की वैकल्पिक व्यवस्था की गई है। इसके तहत शिक्षाकर्मी बाहुल्य व तालेबंदी की स्थिति वाले स्कूलों में आसपास पदस्थ सहायक शिक्षकों की डच्यूटी लगाई गई है। इसके साथ ही जनभागीदारी समिति के सदस्यों, आंगनबाड़ी कार्यकताओं एवं गांव के पढ़े-लिखे बेरोजगारों की मदद भी ली जा रही है।

इस दौरान उच्चधिकारियों का उद्देश्य शिक्षाकर्मियों की अनुपस्थिति में स्कूलों में पढ़ाई सुचारू रखना नहीं, बल्कि तालेबंदी की नौबत रोकना है। यही कारण है कि जिले के अधिकारी सारे स्कूलों में पढ़ाई यथावत होने का दावा बिल्कुल नहीं कर रहे हैं, लेकिन इतना जरूर कह रहे हैं कि किसी स्कूल में तालेबंदी नहीं है।

शिक्षाकर्मियों एवं शासन के बीच वार्ता हुई है। इस दौरान कुछ बातें शिक्षाकर्मियों ने रखी हैं, वहीं कुछ शासन ने। एक-दो दिनों में मांगों पर सहमति बनते ही शिक्षाकर्मियों की हड़ताल समाप्त हो जाएगी और स्कूलों में पढ़ाई फिर व्यवस्थित हो जाएगी।
—अजय चंद्राकर, पंचायत एवं स्कूल शिक्षा मंत्री

हम मानते हैं कि हमारी हड़ताल से बच्चों की पढ़ाई ठप है। सरकार द्वारा अपनी घोषणा का क्रियान्वयन आदेश जारी करते ही शिक्षाकर्मी स्कूलों में होंगे। इतना ही नहीं, बल्कि हड़ताल के दिनों में बाधित हुई पढ़ाई को एक्स्ट्रा क्लास लेकर पूरी करेंगे।
—संजय शर्मा, प्रांताध्यक्ष शिक्षाकर्मी संघ





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