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Beijing Olympics, 2008 Beijing Olympics, 2008 बीजिंग.ओलिंपिक या विश्व चैंपियनशिप में जीत के लिए जहां एथलीट खून-पसीना एक करते हैं वहीं, बीजिंग ओलिंपिक का एक चैंपियन ऐसा भी है, जो खेल में जीत के साथ-साथ लुत्फ भी ढूंढ़ता है। जी हां, बीजिंग ओलिंपिक में ‘गोल्डन हैट्रिक’ लगाने वाले जमैकाई एथलीट यूसैन बोल्ट मानते हैं कि उनकी कामयाबी का राज ट्रैक पर लुत्फ उठाना है। बोल्ट ने इस ओलिंपिक में विश्व रिकॉर्ड के साथ 100, 200 और 4 गुणा 100 मी. दौड़ का स्वर्ण जीतने का अनोखा कीर्तिमान बनाया है।
‘जो भी करते हो, मजे लेकर करो’ :-
बोल्ट कहते हैं कि गोल्डन हैट्रिक बनाने के बाद बहुत सारे लोग उनकी इस कामयाबी का राज जानने के लिए उनके पास आए। बोल्ट ने उनसे कहा कि अपनी क्षमताओं के बारे में सभी बखूबी जानते हैं। इसलिए जो भी करो, मन लगाकर मजे के साथ करो।
‘रेस की चिंता कभी नहीं की’ :-
रेस की बाबत बोल्ट कहते हैं कि वे मुकाबले की चिंता नहीं करते। वे जीत के लिए स्वयं पर दबाव नहीं बनाते। ट्रैक पर अपनी पूरी क्षमता से प्रदर्शन करते हैं और उसका लुत्फ उठाते हैं।
‘बिना श्रम के सफलता नहीं’ मिलती :-
बोल्ट कहते हैं कि वे दौड़ से प्यार करते हैं। एक एथलीट का यही कर्म है। यदि वह इससे प्यार नहीं करेगा, तो कामयाबी मुश्किल है। वे कहते हैं कि कठिन अभ्यास के चलते कई बार एथलीट के मन में इसे छोड़ने की इच्छा भी जागती है। लेकिन बिना श्रम के सफलता नहीं मिलती।
लंदन ओलिंपिक में अपना खिताब बचाने उतरूंगा :-
लंबे समय तक चोटी पर रहने का इरादा रखने वाले बोल्ट कहते हैं कि वे लंदन ओलिंपिक में अपने खिताब का बचाव करने उतरेंगे। उन्होंने बीजिंग में बनाए अपने 3 विश्व कीर्तिमानों में से 200 मी. के रिकॉर्ड को सबसे कठिन करार दिया।