न्यूयार्क.बढ़ती आपूर्ति और कमजोर मांग के चलते शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों में 5.4 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। यह 2004 के बाद एक दिन की सबसे बड़ी गिरावट है। शुक्रवार को अमेरिकी क्रूड 6.59 डॉलर या 5.4 फीसदी गिरकर 114.59 बैरल पर बंद हुआ। लंदन ब्रेंट क्रूड 6.24 डॉलर गिरकर 113.92 बेरल पर बंद हुआ।
डॉलर की मजबूती से कमोडिटी बाजार में सभी ओर दबाव महसूस किया जा रहा है। कच्चे तेल की कीमतें जुलाई मध्य में रिकार्ड ऊंचाई पर पहुंचने के बाद पहले ही 20 फीसदी गिर चुकी हैं। अगस्त में तेल उत्पादक व निर्यातक देशों के संगठन ओपेक द्वारा अधिक उत्पादन किए जाने और अमेरिकियों के सैर-सपाटे का बजट कम करने की आशंका के चलते क्रूड की कीमतों में गिरावट आई है।
विश्लेषकों का कहना है कि क्रूड में मुनाफा वसूली का दौर जारी है। क्रूड की कीमतों में पिछले दिनों के उछाल के बाद विश्व स्तर पर इसकी मांग में कमी आई है और इसकी कीमतों में जुलाई मध्य के रिकार्ड स्तर 147 डॉलर प्रति बैरल से गिरावट का रुख है।
लेकिन मौजूदा कीमतें अब भी दिसंबर 2007 के स्तर से 15 फीसदी अधिक हैं।जार्जिया के मसले को लेकर रूस और अमेरिका के बीच उभरे तनाव के कारण पिछले सप्ताह क्रूड के दाम चढ़ने लगे थे।
उधर, ओपेक ने कीमतों में गिरावट का रुख बने रहने की दशा में उत्पादन में कटौती करने की संभावना व्यक्त की है। इस बारे में अगले महीने होने वाली बैठक में फै सला हो सकता है। क्रूड में नरमी और सबप्राइम संकट में घिरे बैंक लेहमेन ब्रदर्स के उबरने की संभावनाओं से अमेरिकी शेयर बाजारों में तेजी का रुख देखा गया।