नई दिल्ली/कोलकाता/भोपाल. टाटा मोटर्स द्वारा नैनो परियोजना को पश्चिम बंगाल से बाहर ले जाने की चेतावनी के एक दिन बाद शनिवार को मध्यप्रदेश समेत कई राज्यों ने इस लखटकिया कार का संयंत्र उनके राज्य में लगाने की पेशकश की है।
खबर है कि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने टाटा मोटर्स को प्रस्ताव दिया है कि नैनो का उत्पादन संयंत्र ग्वालियर के मालनपुर में लगाया जा सकता है और इसके लिए राज्य सरकार हरसंभव सुविधा मुहैया कराएगी।
इस बीच पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री बुद्धदेव दासगुप्ता ने कहा है कि नैनो कार सिंगुर कारखाने से तयशुदा समय अक्टूबर में ही बाहर आएगी। उड़ीसा, महाराष्ट्र और पंजाब ने नैनो परियोजना को अपने राज्य में स्थापित करने के संबंध में टाटा समूह के चेअरमैन रतन टाटा से पेशकश की है।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख ने कहा कि नैनो परियोजना के लिए टाटा को आवश्यक भूमि व जरूरी सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी। तृणमूल कांग्रेस की अगुवाई में चल रहे आंदोलन के चलते टाटा को नैनो परियोजना को पश्चिम बंगाल से स्थानांतरित करने पर विचार करने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
उधर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रणव मुखर्जी ने नैनो संयंत्र को हटाने की टाटा की चेतावनी पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि इस संबंध में फैसला टाटा को करना है कि वे संयंत्र कहां स्थापित करना चाहते हैं। मुखर्जी ने शनिवार को कोलकाता में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य से मुलाकात कर इस मसले पर चर्चा की।
..तो छह माह देर से आएगी नैनो
टाटा मोटर्स, नैनो परियोजना को किसी नई जगह (संभवत: उत्तरांचल) ले जाने का निर्णय लेती है तो यह कार अप्रैल 2009 तक ही सड़कों पर आ पाएगी। इससे नैनो खरीदने के ख्वाहिशमंद लोगों को कार पाने के लिए छह माह और इंतजार करना पड़ सकता है।
होगा 1,000 करोड़ से ज्यादा का नुकसान
नैनो को बंगाल से बाहर ले जाने पर टाटा मोटर्स और कार के डीलरों को 1,000 करोड़ से ज्यादा का नुकसान हो सकता है। यह भूमि और भवन की मद पर खर्च होने वाली वह रकम है। जिसे सिंगुर से संयंत्र हटने की दशा में बट्टे खाते में डालनी होगी।