इंदौर. राशन की दुकानों से गरीब को मिलने वाला अनाज सेंधमारी का शिकार हो रहा है। जिन भंडार केंद्रों के जरिये अनाज दुकानों तक पहुंचता है, वहीं से हर ट्रक पर दो क्ंिवटल तक अनाज की चोरी हो रही है। जब तौलकांटे पर अनाज तुलाई के लिए जाता है तो क्षमता के कम वजन की शिकायत मिल रही है। इसका खामियाजा ट्रक के साथ अनाज वितरण करने वाले क्लर्क को भुगतना पड़ रहा है। उसके वेतन से कम पाए जाने वाले अनाज की भरपाई की जा रही है।
हर दिन दस ट्रक माल भंडार केंद्रों से लोड किया जाता है। हर ट्रक में नौ टन माल भरा जाता है। प्रत्येक ट्रक से करीब दो क्विंटल अनाज कम निकलता है। इस हिसाब से रोजाना 20 क्विंटल अनाज की चोरी भंडार केंद्रों से की जा रही है। शहर को पांच भंडारण केंद्रों से आपूर्ति की जाती है। यह केंद्र पालदा, नावदापंत, सांवेर रोड, लक्ष्मीबाई नगर में स्थित हैं।
नियमानुसार शहरी सीमा में भंडारण (गोडाउन) होना चाहिए। केवल लक्ष्मीबाईनगर का गोडाउन शहर में है। लेकिन यहां से कोटा जारी नहीं किया जाता। सबसे ज्यादा गेहूं की चोरी होती है। इसके बाद चावल और शकर का नंबर आता है।
एक किलोमीटर दूर तौलकांटा
अनाज की तुलाई भी गोडाउन के पास वाले तौलकांटों से नहीं होती। सभी जगह करीब एक किलोमीटर दूर तौलकांटों पर ले जाकर तुलाई होती है।
नहीं होती भंडारणों की जांच
प्रशासन ने पांच गोडाउन किराए पर लिए हैं। शासन से मिलने वाले अनाज को यहीं रखा जाता है लेकिन इन गोडाउन की जांच करने के लिए खाद्य नियंत्रक विभाग जाता ही नहीं है। पांचों गोडाउन में बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव है। पहुंच मार्ग, टूटी-फूटी छत न होने से अनाज भी खराब होता है।
हमें शिकायत नहीं की
खाद्य नियंत्रक एच.एस. परमार ने कहा राशन की दुकानों पर इलेक्ट्रानिक तौलकांटे लगाए हैं इसलिए वहां कम अनाज नहीं उतर रहा। अगर गोडाउन से अनाज कम भरा जा रहा है भंडार केंद्रों की जांच करा ली जाएगी।